खेती में नवाचार की नई कहानी लिख रहे दमोह के किसान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
अन्नदाताओं की आमदनी बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता, एमएसपी पर धान व ज्वार-बाजरा खरीदी के लिए 10 अक्टूबर तक पंजीयन
बलराम कृषि महोत्सव में मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से किसानों से किया आत्मीय संवाद
भोपाल/छिन्दवाड़ा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि दमोह जिले के किसान खेती-किसानी में नवाचार अपनाकर नई पहचान बना रहे हैं। बुंदेलखंड की धरती को नमन करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। अन्नदाताओं की आमदनी बढ़ाना सरकार का प्रमुख लक्ष्य है। खेत से बाजार तक और कृषि सामग्री से लेकर किसानों के खातों तक व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को मंत्रालय से दमोह जिले में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित कर रहे थे। उन्होंने दमोह जिले के किसानों से आत्मीय संवाद करते हुए उनकी खेती-किसानी की जानकारी ली।
एमएसपी पर धान और ज्वार-बाजरा खरीदी के लिए पंजीयन शुरू
मुख्यमंत्री ने किसानों को बताया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान एवं ज्वार-बाजरा के उपार्जन के लिए किसान पंजीयन 15 सितंबर से शुरू हो गया है। किसान 10 अक्टूबर तक पंजीयन करा सकेंगे। उन्होंने कहा कि किसानों की उपज के उचित मूल्य और समय पर भुगतान के लिए सरकार लगातार व्यवस्थाओं को बेहतर बना रही है।
फसल विविधीकरण से बढ़ाएं आमदनी
मुख्यमंत्री ने किसानों से फसल विविधीकरण, आधुनिक तकनीक, नवाचार, उद्यानिकी, प्राकृतिक एवं जैविक खेती, गौपालन, डेयरी और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि खेती के साथ अन्य गतिविधियों को जोड़कर किसान अपनी आय के नए स्रोत विकसित कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि दमोह जिले में करीब 6 लाख 72 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में खेती होती है, जिसमें लगभग 86 प्रतिशत कृषि क्षेत्र सिंचित है। दमोह का चना देशभर में प्रसिद्ध है और खाद्य प्रसंस्करण तथा एग्रो प्रोडक्ट्स निर्माण के क्षेत्र में भी जिले में नई संभावनाएं विकसित हो रही हैं।
अश्वगंधा और मखाने की खेती को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने बताया कि दमोह जिले में अश्वगंधा की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए 100 से अधिक किसानों को निःशुल्क बीज और कृषि प्रशिक्षण दिया गया है। आगामी खरीफ सीजन में मखाने का उत्पादन भी नवाचार के रूप में शुरू किया जाएगा।
पशुपालन के क्षेत्र में भी जिले में तेजी से काम हो रहा है। बीते एक वर्ष में नौ नई दुग्ध सहकारी संस्थाएं पंजीकृत हुई हैं। क्षीरधारा ग्राम योजना के पहले चरण में जिले के 65 गांवों का चयन किया गया है। मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना के तहत जिले में 14 स्वच्छ फिश पार्लर बनाए जा रहे हैं।
सिंचाई परियोजनाओं से बढ़ेगा कृषि क्षेत्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि केन-बेतवा राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना दमोह जिले के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। तेंदूखेड़ा में 165 करोड़ रुपये से अधिक लागत की झापन नाला मध्यम सिंचाई परियोजना से 17 से अधिक गांवों की करीब 3,600 हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होगी।
सतधरु मध्यम सिंचाई परियोजना, पारना जलाशय और दादपुर स्टॉप डेम के निर्माण कार्य भी तेजी से किए जा रहे हैं। सरकार ने जिले में सूक्ष्म सिंचाई का रकबा बढ़ाकर 1.35 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
सभी विकासखंडों में जैविक-प्राकृतिक खेती हाट बाजार
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए जिले के सभी सात विकासखंडों में जैविक एवं प्राकृतिक खेती हाट बाजार शुरू किए गए हैं। पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि किसानों की सुविधा के लिए किसान क्रेडिट कार्ड का ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया गया है, जिसके माध्यम से किसान आसानी से क्रेडिट कार्ड बनवा सकते हैं।
प्रगतिशील किसानों से किया संवाद
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्राकृतिक एवं जैविक खेती करने वाले प्रगतिशील किसानों खम्मन सिंह लोधी, समीर कुमार अहिरवाल, राम कुरेरिया सहित अन्य किसानों से संवाद कर उनकी खेती, नवाचार और अनुभवों की जानकारी ली।
कार्यक्रम में दमोह के लोकसभा सांसद राहुल सिंह लोधी, वरिष्ठ विधायक जयंत मलैया, विधायक उमादेवी खटीक, जिला पंचायत अध्यक्ष रंजीता गौरव पटेल सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। मंत्रालय से उच्च शिक्षा, आयुष एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री तथा दमोह जिले के प्रभारी मंत्री इन्दर सिंह परमार और अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय नीरज मंडलोई ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम में सहभागिता की।