प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में शक्ति और सामर्थ्य से सशक्त हो रहा भारत : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
विजयादशमी सत्य, साहस और न्याय की विजय का पर्व, वीर सैनिकों के शौर्य को किया नमन
भोपाल/छिंदवाड़ा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विजयादशमी के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विजयादशमी सत्य की शक्ति और सामर्थ्य की सार्थकता का महापर्व है। यह पर्व हमें संदेश देता है कि अन्याय कितना भी प्रबल क्यों न हो, उसके विरुद्ध खड़े होने का संकल्प उससे बड़ा होता है। भगवान श्रीराम की विजय सत्य, मर्यादा और न्याय की प्रतिष्ठा का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान श्रीराम के जीवन से हमें सीख मिलती है कि शक्ति का उद्देश्य लोककल्याण होना चाहिए। उनका पराक्रम मर्यादा से प्रेरित था और उनके संकल्प जनहित के लिए समर्पित थे। उन्होंने समाज के विभिन्न वर्गों को साथ लेकर यह सिद्ध किया कि विश्वास, संगठन और सामूहिक प्रयासों से बड़ी से बड़ी चुनौती पर विजय प्राप्त की जा सकती है।
शस्त्र-पूजन शक्ति के साथ उत्तरदायित्व का प्रतीक
डॉ. यादव ने कहा कि विजयादशमी पर शस्त्र-पूजन भारतीय संस्कृति में शक्ति के विवेकपूर्ण उपयोग और उससे जुड़े उत्तरदायित्व का प्रतीक है। शक्ति का उपयोग निर्बलों की रक्षा, अन्याय के विरोध और मानवता के कल्याण के लिए होना चाहिए। मर्यादा और अनुशासन से युक्त शक्ति ही समाज में विश्वास पैदा करती है।
उन्होंने कहा कि आज भारत का राष्ट्रीय आत्मविश्वास भी इसी भावना को प्रतिबिंबित करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सुरक्षा के प्रति दृढ़ संकल्प और भारतीय सशस्त्र बलों का अदम्य पराक्रम प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का विषय है। भारत शांति, सहयोग और सह-अस्तित्व में विश्वास करता है, लेकिन अपनी संप्रभुता, स्वाभिमान और नागरिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक निर्णय लेने में भी दृढ़ है।
ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सैन्य पराक्रम का प्रतीक
मुख्यमंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों ने आतंकवादी ढांचों के विरुद्ध कार्रवाई कर साहस, कौशल और सैन्य दक्षता का परिचय दिया। उन्होंने देश की रक्षा में तैनात वीर जवानों को नमन करते हुए कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए उनका समर्पण प्रत्येक नागरिक के लिए प्रेरणास्रोत है।
उन्होंने कहा कि सीमा पर तैनात सैनिक अपने परिवार से दूर रहकर देशवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। सैनिकों के साथ-साथ उनके परिवारों, वीर नारियों और सैन्य परिवारों का त्याग भी सम्मान का पात्र है। उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
सुशासन का लक्ष्य नागरिकों का सम्मान और कल्याण
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में सुशासन के प्रयासों का केंद्र नागरिकों की सुरक्षा, सम्मान और कल्याण है। माताओं-बहनों को सुरक्षित वातावरण, युवाओं को प्रतिभा निखारने के अवसर, किसानों को समृद्धि और जरूरतमंदों को शासन की योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराना सरकार का संकल्प है।
उन्होंने कहा कि शासन की सफलता का वास्तविक मापदंड समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन में आने वाला सकारात्मक बदलाव है। जब नागरिकों को समय पर न्याय, सहज सेवाएं और आगे बढ़ने के अवसर मिलते हैं, तब रामराज्य की भावना जनजीवन में साकार होती है।
अहंकार और भेदभाव से मुक्त समाज बनाने का आह्वान
मुख्यमंत्री ने कहा कि विजयादशमी केवल रावण दहन का पर्व नहीं, बल्कि अपने भीतर मौजूद अहंकार, लोभ, भेदभाव और कर्तव्य के प्रति उदासीनता को दूर करने का अवसर भी है। ईमानदारी को व्यवहार, सद्भाव को संबंधों और अनुशासन को जीवनशैली में अपनाना आवश्यक है। समाज की एकता और राष्ट्रहित के प्रति सामूहिक समर्पण ही भारत की सबसे बड़ी ताकत है।
अंत में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे भगवान श्रीराम की मर्यादा, मां दुर्गा की शक्ति और वीर सैनिकों के साहस से प्रेरणा लेकर सत्य, न्याय और कर्तव्य के मार्ग पर आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि शक्ति से सुरक्षा, सामर्थ्य से समृद्धि और सत्य से विजय के संकल्प के साथ देश के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में योगदान दें।
मुख्यमंत्री ने सभी प्रदेशवासियों को विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।