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आनंद संस्थान के मास्टर ट्रेनर श्री मुकेश करुवा ने आनंद विभाग की स्थापना व अवधारणा को स्पष्ट करते हुए अपनी लाइफ बैलेंस शीट को जानने के लिए विभिन्न टूल्स के माध्यम से साझा करते हुए अल्पविराम के माध्यम से हम अपने बोझ को कैसे हल्का करके सुखद अनुभव कर सकेंगे, इसकी प्रक्रिया बतलाई। मास्टर ट्रेनर एवं सहायक प्राध्यापक सुश्री रजनी कवरेती ने आनंद की वास्तविक अनुभुति के लिये अपने रिश्तों से जुड़े अनुभव साझा किए। आनंदम एसोसियेट श्री कैलाश सोनेवार ने अल्पविराम को कैसे और कब सुविधा के अनुसार हम दैनिक दिनचर्या में समावेश करके अपनी जिंदगी को आनंदमय बनाकर हम स्वयं को स्वस्थ व सुंदर बनाने में कामयाब बन सकेंगे। उन्होंने राज्य आनंद संस्थान के विभिन्न आयामों जैसे आनंद उत्सव, आनंद सभा, अल्पविराम कार्यक्रम, आनंद क्लब, आनंद शिविर, हैप्पीनेस इंडेक्स आदि से भी सदस्यों को परिचित कराया। आनंदम सहयोगी एवं आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ.नितिन टेकरे ने अपने जीवन में मिली मदद से उनका जीवन किस प्रकार सार्थक हुआ, इससे जुड़ा अनुभव शेयर किया। आनंदम सहयोगी एवं योग प्रशिक्षक डॉ.पवन नेमा ने भी भागदौड़ भरी जिंदगी में किस प्रकार तनावमुक्त रहा जाये व स्वयं में किस प्रकार आनंद को ढूंढा जाये, इसे जानने का अल्पविराम को एक कारगार युक्ति बताया । कार्यक्रम में आजीविका मिशन के सहायक प्रबंधक श्री अमर बहादुर सिंह ने अल्पविराम कार्यक्रम के महत्व को जानकर इस कार्यक्रम की सराहना की ।


