मजदूर दिवस पर श्रमिकों का सम्मान, अधिकारों के लिए उठी आवाज
छिंदवाड़ा। 1 मई अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर अरविंद डाहाके के नेतृत्व में श्रमिक साथियों के साथ उत्साहपूर्वक मजदूर दिवस मनाया गया। इस दौरान श्रमिकों का मुँह मीठा कर एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका सम्मान किया गया।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि मजदूर राष्ट्र निर्माण की रीढ़ हैं और हर क्षेत्र में उनका योगदान महत्वपूर्ण है, बावजूद इसके उन्हें उनके अधिकार पूरी तरह नहीं मिल पा रहे हैं। मजदूर दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि अधिकार, सम्मान और सुरक्षा की लड़ाई का प्रतीक है।

इस अवसर पर श्रमिकों की समस्याओं को लेकर चिंता जताई गई। बताया गया कि कई मजदूरों को न्यूनतम वेतन नहीं मिल रहा, असंगठित क्षेत्र के श्रमिक सामाजिक सुरक्षा से वंचित हैं तथा स्वास्थ्य और आवास योजनाएं कागजों तक सीमित हैं। साथ ही श्रम कानूनों के पालन में कमी और ठेका प्रथा के कारण शोषण बढ़ने की बात भी सामने आई।

वक्ताओं ने मांग की कि सभी मजदूरों को समय पर और सम्मानजनक वेतन मिले, कार्यस्थलों पर सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं तथा श्रमिकों को सस्ती या निःशुल्क स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास योजनाओं का लाभ दिया जाए। साथ ही असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा और पेंशन योजनाओं से जोड़ने और श्रम कानूनों का सख्ती से पालन कराने की मांग की गई।

कार्यक्रम में “मजदूर मजबूत तो देश मजबूत” का संदेश देते हुए श्रमिकों के अधिकारों के लिए निरंतर संघर्ष का संकल्प लिया गया।

इस अवसर पर मिथिलेश सिंह, राजकुमार मुंडाफुले, सुनील सिमय्या, किसना ठाकरे, राजकुमार यादव, प्रवीण महाजन, किशोर हिवसे, बलिप्रसाद झरबडे, हेमराज टांडेकर, किशोर गनोंरकर, रामभाऊ चटप, दिनेश कालबांडे, सोनबा येलकर सहित अन्य श्रमिक साथी उपस्थित रहे।