प्रदूषित वातावरण से बचकर मनुष्य अपने शरीर को गंभीर बीमारियों से बचाए,,, श्री पालीवाल

chif editor MANESH SAHU 9407073701
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सच की आंखें आठनेर।आज की परिस्थितियों पर यदि हम गंभीरता से विचार करें तो जल ,वायु,पृथ्वी ,ध्वनि एवं विचार सभी प्रदूषित होते जा रहे हैं।दिन प्रति दिन स्थिति भयावह से भयावह होती जा रही है। कहीं मानव सामूहिक आत्म हत्या की ओर नहीं जा रहा है।मानव जीवन को व्यवस्थित बनाने के लिया भौतिक विकास आवश्यक तो है,परन्तु इस हत तक नहीं कि न उसे भोजन का समय मिले ना ही आराम का।आज आर्थिक उन्नति के लिए मानव दिन रात भागता रहता है,ना समय पर भोजन करता है ना आराम बस एक ही धुन है कमाने की।उपरोक्त कारणों से मानव शरीर विभिन्न बीमारियों से ग्रसित होता जा रहा है,दिन/प्रतिदिन कमजोर हो रहा है। जीवन दवाइयों पर निर्भर हो रहा है।समस्याएं बड़ रही हैं तो हमें उनका समाधान की ओर सोचना चाहिए।समय पर भोजन *आराम* माह में न्यूनतम एक बार यज्ञ में सहभागी बने,प्रतिवर्ष प्रत्येक परिवार वर्षा ऋतु में एक वृक्ष का पौधा रोपित कर उसे बड़ा करे,प्रतिदिन न्यूनतम 1से2 किलोमीटर पैदल चले,15से 20मिनट योग करे,30 मिनट अच्छे साहित्य का अध्ययन करे,अच्छा सोचे, विना किसी स्वार्थ के अच्छे सामाजिक कार्यों में सहयोग करे।।स्वस्थ रहते हुए मानव जीवन को सफल बनाए।
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