फाइलों में दौड़ती योजनाएं... लेकिन नलों में सूखा क्यों?"

chif editor MANESH SAHU 9407073701
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🚰 "फाइलों में दौड़ती योजनाएं... लेकिन नलों में सूखा क्यों?"
छिंदवाड़ा न्यूज़ अपडेट | जुलाई 2026

छिंदवाड़ा शहर में एक बार फिर पेयजल व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। प्रदेश सरकार हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने का दावा कर रही है, लेकिन नगर निगम क्षेत्र के कई वार्डों में रहने वाले लोगों का कहना है कि उन्हें आज भी नियमित पानी नहीं मिल रहा। कहीं कम जलदाब की समस्या है, तो कहीं जर्जर पाइपलाइन के कारण पानी की आपूर्ति बार-बार बाधित हो रही है। ऐसे में नागरिकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है—आखिर करोड़ों की योजनाओं का लाभ जमीन पर कब दिखाई देगा?

स्थानीय नागरिकों के अनुसार कई मोहल्लों में सप्ताह में केवल एक-दो बार ही पानी की सप्लाई हो रही है। कुछ क्षेत्रों में लोग टैंकरों या निजी जल स्रोतों पर निर्भर हैं। महिलाओं और बुजुर्गों को पानी के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है, जिससे रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो रहा है।

चर्चा यह भी है कि नगर निगम द्वारा पेयजल व्यवस्था सुधारने के लिए विस्तृत प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। बताया जाता है कि इसमें कई वार्डों की पुरानी पाइपलाइन बदलने और नई पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव शामिल था। हालांकि, इस प्रस्ताव की वर्तमान स्थिति को लेकर सार्वजनिक रूप से स्पष्ट और आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इसी वजह से लोगों के बीच सवाल लगातार बढ़ रहे हैं।

नगर निगम से जुड़े सूत्रों के अनुसार प्रस्ताव शासन स्तर पर भेजा गया था, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि उसे अंतिम स्वीकृति मिली है या नहीं, और यदि मिली है तो कार्य शुरू होने में देरी क्यों हो रही है। इस संबंध में संबंधित विभागों की ओर से विस्तृत आधिकारिक स्थिति सार्वजनिक नहीं की गई है।

शहरवासियों का कहना है कि नगर निगम प्रशासन, आयुक्त चंद्र प्रकाश राय, संबंधित लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHED) तथा शासन स्तर के जिम्मेदार अधिकारियों को पूरे मामले की वस्तुस्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए। नागरिकों की मांग है कि जिन वार्डों में जल संकट सबसे अधिक है, वहां संयुक्त निरीक्षण कर प्राथमिकता के आधार पर पाइपलाइन सुधार और पेयजल व्यवस्था मजबूत की जाए।

यह भी कहना है कि विकास योजनाओं का उद्देश्य केवल फाइलों में प्रस्ताव बनाना नहीं, बल्कि लोगों तक समय पर सुविधाएं पहुंचाना होना चाहिए। यदि किसी स्तर पर प्रशासनिक या प्रक्रियागत देरी है तो उसकी जानकारी भी पारदर्शिता के साथ जनता के सामने रखी जानी चाहिए। इससे भ्रम की स्थिति भी खत्म होगी और लोगों का विश्वास भी मजबूत होगा।

अब इस पूरे मामले में कुछ अहम सवाल सामने हैं—

- पेयजल योजना के प्रस्ताव की वर्तमान स्थिति क्या है?
- किन वार्डों के लिए बजट स्वीकृत हुआ और किनके लिए नहीं?
- कार्य प्रारंभ होने में देरी की वास्तविक वजह क्या है?
- जल संकट झेल रहे लोगों को तत्काल राहत कब मिलेगी?

फिलहाल इन सवालों के स्पष्ट और आधिकारिक जवाब का इंतजार है। जब तक संबंधित विभाग अपनी स्थिति सार्वजनिक नहीं करते, तब तक यह मुद्दा शहर में चर्चा का विषय बना रहेगा।

मनेश पत्रकार आपसे पूछता है…
क्या आपके वार्ड में भी पानी की समस्या बनी हुई है? आपके यहां सप्ताह में कितनी बार पानी आता है? अपनी राय और अनुभव कमेंट में जरूर लिखिए।

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