लोकसभा के मानसून सत्र में नियम 377 के अंतर्गत बालाघाट-सिवनी के किसानों की आवाज़ बनीं सांसद भारती पारधी, जल संरक्षण एवं सिंचाई परियोजनाओं की रखी सशक्त मांग

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सच की आँखे नई दिल्ली।

लोकसभा में नियम 377 के अंतर्गत बालाघाट-सिवनी संसदीय क्षेत्र की सांसद श्रीमती भारती पारधी ने किसानों के जीवन से जुड़े एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय—जल संरक्षण, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार तथा वाटरशेड विकास परियोजनाओं—को सदन के पटल पर प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए कहा कि यदि समय रहते जल संरक्षण और सिंचाई के प्रभावी उपाय नहीं किए गए तो कृषि उत्पादन, किसानों की आय तथा क्षेत्र की जल सुरक्षा पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है।

अपने वक्तव्य में सांसद भारती पारधी ने बताया कि बालाघाट-सिवनी कृषि प्रधान जिले हैं, जहाँ अधिकांश किसान वर्षा आधारित खेती पर निर्भर हैं। अनियमित वर्षा, लगातार गिरते भू-जल स्तर और सीमित सिंचाई संसाधनों के कारण किसान आज भी अनेक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। क्षेत्र का बड़ा हिस्सा एक फसलीय होने के कारण किसानों को वर्ष भर स्थायी आय नहीं मिल पाती।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 (PMKSY-WDC) जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण तथा सिंचाई क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल है। यह योजना खेतों तक पानी पहुँचाने के साथ-साथ भविष्य की पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों के संरक्षण का भी मजबूत माध्यम है। इसके बावजूद बालाघाट-सिवनी जैसे जल संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र को अब तक नई वाटरशेड परियोजनाओं का लाभ नहीं मिल सका है।

इसी विषय को गंभीरता से उठाते हुए सांसद भारती पारधी ने बालाघाट-सिवनी में नई वाटरशेड परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति देने तथा वर्ष 2013-14 में परसवाड़ा में बंद हुई वाटरशेड परियोजना को पुनः प्रारंभ करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से वर्षा जल का संरक्षण होगा, भू-जल स्तर में सुधार आएगा, सिंचाई का दायरा बढ़ेगा, किसानों की लागत कम होगी, कृषि उत्पादन बढ़ेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

सांसद श्रीमती भारती पारधी लगातार संसद में बालाघाट-सिवनी के विकास, किसानों के हित, रेलवे, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना से जुड़े विषयों को प्रभावी ढंग से उठाती रही हैं। नियम 377 के अंतर्गत इस महत्वपूर्ण विषय को सदन के पटल पर लाकर उन्होंने एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि वे अपने संसदीय क्षेत्र की प्रत्येक जनसमस्या को राष्ट्रीय मंच तक पहुँचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही हैं।

नियम 377 का महत्व

लोकसभा का नियम 377 सांसदों को अपने संसदीय क्षेत्र अथवा राष्ट्रीय महत्व के जनहित से जुड़े विषयों को सदन के पटल पर रखने का अवसर प्रदान करता है। इस प्रक्रिया के अंतर्गत सांसद लिखित रूप में अपना विषय प्रस्तुत करते हैं। प्राप्त होने वाले बड़ी संख्या में प्रस्तावों में से प्रत्येक बैठक के लिए केवल 30 विषयों का ही चयन किया जाता है, जिन्हें सदन के पटल पर रखने की अनुमति मिलती है। इसके बाद संबंधित मंत्रालय उन विषयों पर विचार कर आवश्यक कार्रवाई करता है और सांसद को इसकी जानकारी भी उपलब्ध कराई जाती है।

उल्लेखनीय है कि इस बैठक के लिए चयनित 30 विषयों में सांसद श्रीमती भारती पारधी का विषय चौथे क्रम पर रखा गया। यह उनकी सक्रिय संसदीय भूमिका, जनहित के मुद्दों के प्रति गंभीरता तथा सदन में प्रभावी उपस्थिति का प्रमाण है। बालाघाट-सिवनी के विकास के प्रति उनकी निरंतर प्रतिबद्धता और सक्रियता उन्हें क्षेत्र की जनता की एक सशक्त आवाज़ के रूप में स्थापित करती है।
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