सच की आँखे भोपाल। दतिया विधानसभा उपचुनाव के बाद तेली/साहू/राठौर समाज के बीच भाजपा की कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। समाज के कई पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का कहना है कि वर्षों से भाजपा का समर्थन करने के बावजूद समाज को संगठन और सत्ता में अपेक्षित सम्मान एवं प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि दतिया उपचुनाव से पहले साहू समाज की ओर से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को तेली समाज के उम्मीदवार के नाम का प्रस्ताव सौंपा गया था। उनका दावा है कि दतिया विधानसभा में साहू/तेली समाज की राजनीतिक भूमिका स्पष्ट रूप से देखने को मिली और समाज की एकजुटता ने चुनावी समीकरणों को प्रभावित किया। इसके बावजूद समाज के सुझाव पर विचार नहीं किया गया। उनका आरोप है कि समाज की उपेक्षा का असर दतिया उपचुनाव के माहौल और परिणामों में भी देखने को मिला। समाज के लोगों ने हाल ही में राज्य शासन द्वारा विभिन्न निगमों और मंडलों में की गई नियुक्तियों पर भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि इन नियुक्तियों में साहू/तेली/राठौर समाज के किसी भी प्रतिनिधि को स्थान नहीं दिया गया, जिससे समाज में गहरा रोष व्याप्त है। उनका कहना है कि इससे यह संदेश जा रहा है कि चुनाव के समय समाज के वोट तो महत्वपूर्ण हैं, लेकिन सत्ता और निर्णय प्रक्रिया में उचित भागीदारी नहीं दी जा रही। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि प्रदेश में तेली-साहू-राठौर समाज बड़ी संख्या में निवास करता है और वर्षों से भाजपा के साथ मजबूती से खड़ा रहा है। इसके बावजूद समाज को संगठन, शासन, निगम-मंडलों, आयोगों तथा अन्य महत्वपूर्ण संस्थाओं में अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है। तेली/साहू/राठौर समाज का कहना है कि यदि समय रहते समाज को सम्मानजनक भागीदारी नहीं दी गई, तो समाज अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर स्वतंत्र निर्णय लेने के लिए विवश होगा। समाज के पदाधिकारियों ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से आग्रह किया है कि अभी भी समय है। निगम-मंडलों एवं अन्य महत्वपूर्ण संस्थाओं में तेली-साहू-राठौर समाज को सम्मानजनक स्थान देकर समाज का विश्वास पुनः मजबूत किया जाए। उनका कहना है कि लगातार हो रही अनदेखी से कार्यकर्ताओं और समाज में निराशा बढ़ रही है, जिसका प्रभाव भविष्य के चुनावों पर पड़ सकता है। तेली/साहू/राठौर समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का विरोध करना नहीं, बल्कि अपने समाज को उसका उचित सम्मान, भागीदारी और राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिलाना है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस विषय पर गंभीरता से निर्णय नहीं लिया गया, तो समाज लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आगे की रणनीति तय करेगा।
निगम-मंडलों में हिस्सेदारी नहीं मिली तो बढ़ेगी दूरी, तेली-साहू-राठौर समाज का भाजपा को संदेश
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अगस्त 04, 2026
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