पन्ना स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्स कर्मचारियों के शोषण के आरोप
आधी सैलरी देने और नौकरी के नाम पर वसूली के आरोप, शिकायतों के बावजूद कार्रवाई पर उठे सवाल
पन्ना। जिले के स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति और मानदेय को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। जिला चिकित्सालय से लेकर ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों तक तैनात 400 से अधिक आउटसोर्स कर्मचारियों के आर्थिक शोषण का आरोप लगाया जा रहा है। आरोप है कि कलेक्टर रेट के अनुसार निर्धारित मानदेय की पूरी राशि कर्मचारियों को नहीं मिल रही है और उन्हें आधे से भी कम भुगतान किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।
स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों के अनुसार, मानदेय की शेष राशि में अनियमितता की जा रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है। यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह कर्मचारियों के अधिकारों और शासन के नियमों के गंभीर उल्लंघन का मामला हो सकता है।
एजेंसी बदली, लेकिन सवाल बरकरार
जानकारी के अनुसार, पूर्व में आउटसोर्स एजेंसी ‘कमठेंन आउटसोर्स एजेंसी’ को लेकर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आने के बाद उसे ब्लैकलिस्ट किए जाने की कार्रवाई की गई थी। इसके बाद वर्ष 2024 में एजेंसी का नाम बदलकर ‘स्काई बुल’ किए जाने और दोबारा ठेका प्राप्त करने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
आरोप यह भी है कि एजेंसी बदलने के बाद पहले से कार्यरत कई कर्मचारियों को हटाकर नए लोगों की नियुक्ति की गई।
नौकरी के नाम पर 30 हजार रुपए मांगने के आरोप
मामले में सबसे गंभीर आरोप नए कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि कुछ बेरोजगार युवाओं से नौकरी दिलाने के नाम पर करीब 30-30 हजार रुपए तक की राशि मांगी गई। कुछ युवाओं द्वारा दलालों के माध्यम से राशि दिए जाने के बावजूद नौकरी नहीं मिलने और रकम वापस नहीं किए जाने की शिकायतें भी सामने आने की बात कही जा रही है।
स्थानीय स्तर पर इस संबंध में बड़े पैमाने पर अवैध वसूली किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित दस्तावेज, शिकायतकर्ताओं के बयान और विभागीय जांच आवश्यक है।
पीएफ राशि को लेकर भी सवाल
आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य निधि (पीएफ) को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि उनके नाम पर पीएफ की राशि काटे जाने अथवा जमा किए जाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं है। कई कर्मचारियों ने पीएफ खाते में राशि जमा नहीं होने अथवा कटौती से संबंधित जानकारी स्पष्ट नहीं होने की शिकायत की है। इस पूरे मामले की जांच होने पर ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।
शिकायतों के बाद भी कार्रवाई का इंतजार
बताया जा रहा है कि नियमित कर्मचारियों और विभिन्न कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों द्वारा आउटसोर्स कर्मचारियों के मानदेय, नियुक्ति और पीएफ से जुड़ी अनियमितताओं को लेकर संबंधित अधिकारियों एवं उच्चाधिकारियों से शिकायतें की जा चुकी हैं। इसके बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से विभागीय व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
मामले में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाती है तो कर्मचारियों के मानदेय, बैंक खातों में किए गए भुगतान, पीएफ जमा राशि, नियुक्ति प्रक्रिया और एजेंसी के ठेका दस्तावेजों की जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। स्वास्थ्य विभाग और संबंधित एजेंसी का पक्ष सामने आने के बाद खबर को और स्पष्टता मिल सकेगी।