पूर्व राज्यपाल अनुसुईया उइके ने किया स्टार्टअप एवं उद्यमिता कार्यशाला का शुभारंभ
विद्यार्थियों से नवाचार अपनाने और रोजगार सृजन करने का किया आह्वान
छिंदवाड़ा। छत्तीसगढ़ एवं मणिपुर की पूर्व राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने इंदिरा गांधी शासकीय पॉलीटेक्निक महाविद्यालय, छिंदवाड़ा में आयोजित दो दिवसीय इनक्यूबेशन, स्टार्टअप एवं उद्यमिता कार्यशाला का उद्घाटन किया। सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत आयोजित इस कार्यशाला में उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी रुचि और क्षमता पहचानकर नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने तथा नौकरी तलाशने के साथ-साथ रोजगार सृजन करने वाला बनने के लिए प्रेरित किया।
युवाओं के नए विचार बन सकते हैं रोजगार के अवसर
पूर्व राज्यपाल अनुसुईया उइके ने कहा कि युवाओं में प्रतिभा, तकनीकी कौशल और नए विचारों की कमी नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि वे समाज की समस्याओं को समझें और उनके समाधान के लिए नवाचारपूर्ण पहल करें। विद्यार्थियों को अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग कर नए अवसर विकसित करने की दिशा में प्रयास करना चाहिए। उन्होंने युवाओं से आत्मनिर्भर बनने और उद्यमिता के माध्यम से समाज के विकास में योगदान देने का आह्वान किया।
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आलोक यादव ने पूर्व राज्यपाल का शॉल, श्रीफल एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मान किया। उन्होंने कार्यशाला को विद्यार्थियों के कौशल विकास और उद्यमशीलता को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
व्यावहारिक गतिविधियों से सीखेंगे उद्यमिता के गुर
प्राचार्य डॉ. आलोक यादव ने कहा कि तकनीकी शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को अपने कौशल और नवाचार के माध्यम से सामाजिक समस्याओं का समाधान करने तथा रोजगार के नए अवसर विकसित करने के लिए सक्षम बनाना भी है।
कार्यशाला के प्रथम दिवस शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, छिंदवाड़ा के वाणिज्य विभाग के प्रोफेसर मनोहर सिंह तथा सोनी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के संचालक एवं निदेशक मनोज सोनी ने प्रमुख वक्ता के रूप में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने स्टार्टअप की अवधारणा, समस्या समाधान और सफल उद्यम स्थापित करने के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी। वक्ताओं ने बताया कि किसी भी सफल उद्यम की शुरुआत किसी समस्या की पहचान और उसके व्यावहारिक समाधान की खोज से होती है।
बिजनेस आइडिया और स्वरोजगार पर दिया जोर
कार्यशाला के दौरान विभिन्न व्यावहारिक गतिविधियों एवं टूल्स के माध्यम से विद्यार्थियों की रुचियों, क्षमताओं और नए विचारों को पहचानने का प्रयास किया गया। विद्यार्थियों को अपने विचारों की उपयोगिता समझने, बिजनेस आइडिया विकसित करने, स्थानीय समस्याओं के तकनीकी समाधान तलाशने और व्यवसाय मॉडल तैयार करने की जानकारी दी गई।
इसके साथ ही विद्यार्थियों को तकनीकी कौशल और रचनात्मक सोच का समन्वय कर स्वरोजगार के अवसर विकसित करने तथा भविष्य में दूसरों के लिए भी रोजगार उपलब्ध कराने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन एवं समन्वय श्रीमती नीलम खासकलम ने किया, जबकि सह-समन्वयक राकेश कावरे रहे। आयोजन में स्टाफ सदस्य शाइस्ता मंसूरी, ओम कटकवार, स्वाति चौरसिया, ममता बघेल, आकांक्षा बुनकर, राधेश्याम सनोदिया एवं अर्चना तिवारी का सहयोग रहा। अंत में राकेश कावरे ने आभार व्यक्त किया।
दो दिवसीय कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को अपने विचारों को व्यावहारिक स्वरूप देने, नवाचार की संभावनाएं तलाशने और भविष्य में सफल उद्यमी बनने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है।