ग्राम पंचायत मनरेगा मैट संघ ने ,रैली निकालकर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

chif editor MANESH SAHU 9407073701
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 ग्राम पंचायत मनरेगा मैट संघ ने ,रैली निकालकर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

मनरेगा में काम के दिन,मजदूरी बढाने के लिए करेंगे- 23 को हल्लाबोल आंदोलन: वासुदेव शर्मा


छिंदवाड़ा। ग्राम पंचायतों के मनरेगा मेठों की जिला स्तरीय बैठक दीनदयाल पार्क में संघ के जिला अध्यक्ष मधु कुमार यादव की अध्यक्षता एवं कामगार कर्मचारी कांग्रेस के जिला अध्यक्ष वासुदेव शर्मा की विशेष उपस्थिति में संपन्न हुई, जिसमें बलिराम हरसूले, कमलेश बैलवंशी, धनीराम ठाकरे, भोलू रेहडवे, कैलाश उइके सहित जिला एवं ब्लाक के पदाधिकारी उपस्थित रहे।

 बैठक के बाद रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और ज्ञापन देकर मांग की कि मनरेगा में 200 दिन काम, कलेक्टर दर पर मजदूरी एवं मैटको नियुक्ति पत्र देकर उनका मानदेय तय किया जाए।
 7 दिन में मांगों का निराकरण नहीं हुआ तो 23 सितंबर को मैट
 और मनरेगा श्रमिक मिलकर कलेक्ट्रेट पर हल्लाबोल आंदोलन करेंगे।
मैट संघ की बैठक को संबोधित करते हुए वासुदेव शर्मा ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने केंद्रीय मंत्री रहते हुए 2005 में ग्रामीण गरीबों को रोजगार का अधिकार दिलाते हुए रोजगार गारंटी कानून बनाया था, जो 100 दिन के काम और कलेक्टर दर पर मजदूरी के भुगतान का कानून था, इससे कानून ने ग्रामीणों इलाकों में बडी संख्या में रोजगार पैदा किए, सचिव, रोजगार सहायक, मेठ जैसी नौकरियां मिलीं, जब तक कनलनाथजी केंद्रीय मंत्री रहे, मनरेगा में बडी संख्या में गरीबों को काम मिला और पंचायतों में विकास कार्य चले। 

2014 में केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद मनरेगा के बजट में कटौती शुरू हो गई, आज स्थिति यह है कि मांगने पर भी मजदूरों को काम नहीं मिलता, भाजपा सरकारों ने मनरेगा का गला घोंट दिया है, उसे पूरी तरह बंद करना चाहती है, मनरेगा बंद हो गई तो न मजदूरों को काम मिलेगा और न ही सचिव, रोजगार सहायकों, मेठों की नौकरी बचेगी, इसलिए मैट श्रमिकों को मनरेगा बचाने का संघर्ष मिलकर करना होगा।

23 सितंबर को होने वाले हल्लाबोल आंदोलन का समर्थन करते हुए वासुदेव शर्मा ने कहा कि हमारा संगठन आपके साथ है और वह पूरी ताकत के साथ आपके आंदोलन में शामिल रहेगा। उन्होंने कहा कि भाजपा की शिवराज सरकार गरीब कामगार विरोधी है, जिसने मनरेगा में राज्य का हिस्सा कभी नहीं मिलाया, इस कारण ही मेठों को मानदेय नहीं मिल पा रहा है। 

शर्मा ने कहा भाजपा की सरकार ने गरीब मजदूरों, कामगारों, छोटे कर्मचारियों को अधिकारविहीन कर दिया है, जिन्हें न तो सम्मानजनक पारिश्रमिक मिलता है और न ही काम मिलता रहेगा इसकी कोई गारंटी है, पूरा सरकारी बजट मुख्यमंत्री, भाजपा नेताओं के भाषणों के लिए बनाए जा रहे आलीशान मंचों पर खर्च हो रहा है, 23 सितंबर को हम सबको मिलकर इसका हिसाब हल्लाबोल आंदोलन के जरिए लेना होगा।

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