शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला पालाचौरई के सहायक ग्रेड-03 मो.तौसीफ खान एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय जुन्नारदेव के लेखापाल श्री जगमोहन इवनाती द्वारा कार्यालय
छिन्दवाड़ा। कलेक्टर श्री शीलेन्द्र सिंह द्वारा गत दिवस शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला पालाचौरई के सहायक ग्रेड-03 मो.तौसीफ खान एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय जुन्नारदेव के लेखापाल श्री जगमोहन इवनाती द्वारा कार्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी जुन्नारदेव में षडयंत्रपूर्वक शासकीय राशि गबन करना पाये जाने पर दोनों कर्मचारियों को तत्काल निलंबित कर दिया गया है ।
कलेक्टर श्री सिंह ने बताया कि कार्यालय जिला कोषालय अधिकारी छिन्दवाडा के पत्र 30 जुलाई 2024 के साथ संलग्न कार्यालय संभागीय संयुक्त संचालक कोष एवं लेखा (ऑडिट प्रकोष्ठ) जबलपुर संभाग के पत्र 26 जुलाई 2024 के साथ संलग्न जांच प्रतिवेदन के अनुसार शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला पालाचौरई के सहायक ग्रेड-03 मो.तौसीफ खान एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय जुन्नारदेव के लेखापाल श्री जगमोहन इवनाती द्वारा कार्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी जुन्नारदेव में षडयंत्रपूर्वक कोषालय सॉफ्टवेयर में दर्ज बैंक खातों में परिवर्तन कर एक राय होकर योजनाबद्ध तरीके से 01 करोड़ 32 लाख 63 हजार 995 रूपये की राशि का गबन कर शासकीय एवं अशासकीय व्यक्तियों के खाते में राज्य की संचित निधि से राशि का आहरण करते हुए उनके बैंक खाते में हस्तानांतरित की गई।
सहायक ग्रेड-03 मो.तौसीफ खान एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय जुन्नारदेव के लेखापाल श्री जगमोहन इवनाती का यह कृत्य पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही, स्वेच्छाचारिता को प्रदर्शित करने के साथ ही मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम (एक) (दो) (तीन) के विपरीत होकर कदाचरण की श्रेणी में आता है। जिसके लिये दोनो कर्मचारियों सहायक ग्रेड-03 मो.तौसीफ खान एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय जुन्नारदेव के लेखापाल श्री इवनाती को मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 9 के उपनियम (2) में दिये गये प्रावधानों के तहत निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला पालाचौरई के सहायक ग्रेड-03 मो.तौसीफ खान का मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी हर्रई नियत किया गया है एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय जुन्नारदेव के लेखापाल श्री इवनाती का मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी बिछुआ नियत किया गया है । निलंबन अवधि में दोनों कर्मचारियों को सहायक ग्रेड-03 मो.तौसीफ खान एवं लेखापाल श्री इवनाती कों नियमानुसार निलंबन भत्ते की पात्रता रहेगी।
जुन्नरदेव का मामला
1.32 करोड के गवन मामले में 16 पर एफआईआर हुई दर्ज
मृतकों एवं रिटायर्ड व्यक्तियों की राशि का किया गया था गवन
वित्त विभाग जबलपुर की टीम द्वारा की गयी थी जांच, सौपा गया था प्रतिवेदन
जुन्नारदेव ---- जुन्नारदेव विकासखंड के विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय मंे लगभग 132 करोड के गवन की जांच बीते दिनों वित्त विभाग जबलपुर की टीम द्वारा की गई थी जिसके बाद उनके द्वारा इस गंभीर मामले में रिकार्ड के आधार पर दोषी पाये गये लोगों की रिपोर्ट जिला कलेक्टर छिन्दवाड़ा एवं जिला पुलिस अधीक्षक छिन्दवाड़ा को भी सौपी थी, जिन पर एफआईआर की कार्यवाहीं प्रस्तावित थी। बुधवार शाम को प्रभारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी चन्द्रकला सातनकर द्वारा जुन्नारदेव थाने पहुंचकर जांच के आधार पर 16 लोगों पर नामजद एफआईआर दर्ज कराई गई।
इन पर हुई एफआईआर, इतनी राशि फर्जी तरीके से खाते में हुई थी हस्तांतरित--- बीते दिनों हुए 1.32 करोड के गवन में शिक्षा विभाग में कार्यरत अधिकारी, कर्मचारी के अतिरिक्त बाहरी लोगां के नाम भी शामिल है जिनके खाते में शासकीय सेवकों की राशि की बंदरबांट की गयी है। इनमें प्रमुख आरोपी के रूप में तात्तकालीन बीईओ के नाम भी सामने आये है इसके अतरिक्त 14 अन्य लोग इस घोटाले में शामिल है।
इनके खातों में डाली गई राशि
1. तौसीफ खान मुख्य लिपिक - 31 लाख
2. शोएब अहमद खान - 27 लाख
3. जिया अहमद खान - 25 लाख
4. फराद कुरैशी - 18.45 लाख
5. इमरान खान - 5.50 लाख
6. शबीना परवीन - 7.50 लाख
7. अजय कुमार आम्रवंशी - 7.00 लाख
8. शोहेल खान - 4.10 लाख
9. शाहिबा अंजुम - 65 हजार
10. इम्तियाज खान - 50 हजार
11. विकास धुर्वे - 32 हजार
12. मुकुल साहू - 32 हजार
इन पर दर्ज हुई एफआईआर ---- गवन मामले में वर्तमान बीईओ द्वारा जुन्नारदेव थाने में तात्कालीन बीईओ आनंदराव लोखंडे, तात्कालीन बीईओ ईस्माइल खान, लिपिक मोहम्मद तोसीफ खान, लेखापाल जगमोहन इवनाती, शोएब खान, जिया अहमद खान, फराज कुरैशी, मोहसिन खान, इमरान खान, शबीना खान, अजय कुमार आम्रवंशी, शोहेल खान, शाहिबा अंजुम, इम्तियाज खान, विकास धुर्वे एवं मुकुल साहू के नाम एफआईआर दर्ज की गई है। बीते लगभग दो माह पूर्व की गई वित्त विभाग की जांच के बाद एफआईआर दर्ज की गई है।
तात्कालीन बीईओ की लॉगइन आईडी और पासवर्ड से निकाले गये पैसे-- इस सब मामले में दो तात्कालीन बीईओ की कार्यप्रणाली पूर्णतः संदेह के घेरे में है जिसमें दोनों की ही लॉगइन आईडी और पासवर्ड से पैसों का ट्रांसफर अन्यत्र के खातों में किया गया है वहीं यदि सहीं जांच की जाये तो पूर्व में भी गवन और राशि के आहारण के अन्य मामले भी उजागर हो सकते है। आमजन द्वारा कहां जा रहा है कि इन अधिकारियों को राजनीतिक संरक्षण भी प्राप्त था जिसके चलते ये गवन और भ्रष्टाचार में संलिप्त थे।
मृतकों के परिजनों को मिलने वाली राशि में किया गया भारी गवन---- इस गवन के मामले में शासकीय सेवा के दौरान कोरोना काल में मृत लोगों के परिजनों को मिलने वाली भारी भरकम रकम का गवन किया गया है जिसमें मास्टर माइंड तौसीफ खान द्वारा समस्त कार्यवाहीं को पूर्ण अंजाम देने की बात स्वीकार भी कर ली गई है। इसमें मृतक अरविन्द शर्मा जिनकी मृत्यु 2021 में र्हु थी जिनके स्वत्व की राशि उनकी धर्म पत्नी के खाते में हस्तांतरित किया जाना था किन्तु उक्त राशि 762000 रूपये जिया अहमद के खाते में डाले गये। राजेन्द्र परिहार की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी को मिलने वाली 08 लाख की राशि फराद कुरैशी के खाते में डाली गई। गीता डेहरिया की मृत्यु के बाद राशि उनके भाई मनोज डेहरिया को मिलनी थी जो खाते में हेरफेर कर अजय कुमार आम्रवंशी के खाते 7.20 लाख की राशि डाली गई। पुरूषोत्तम विश्वकर्मा की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी कुशुम विश्वकर्मा को मिलने वाली 5.50 लाख की राशि इमरान खान के खाते में डाली गई। यह समस्त राशि तात्कालीन बीईओ के लॉगइन पासवर्ड से डाली गई है।
कैशबुक सहित अन्य रिकार्ड जांच टीम को मिले नदारद ----- इन सब गवन के कार्यो को अंजाम देने के दौरान विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में इस दौरान के रिकार्ड भी नहीं मिले है। वित्त विभाग की टीम द्वारा की गई जांच में कैशबुक सहित अन्य आवश्यक रिकार्ड उपलब्ध नहीं रहने या नहीं बनाये जाने के चलते विभाग में कार्यरत लिपिक एवं लेखापाल को पूर्णतः दोषी पाया गया है।
*कोषालय की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान* ----- वित्त विभाग जबलपुर की टीम के जांच करने के पूर्व जिला कोषालय की टीम द्वारा जुन्नारदेव विकासखंड में विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में जांच की गई थी जहां पर जांच उपरांत सभी संलिप्त अधिकारी, कर्मचारियों को क्लीन चिट दी गई थी , अब वित्त विभाग की टीम द्वारा जांच उपरांत 1.32 करोड के गवन की बात सामने आने पर कोषालय की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान खडे़ हो रहे है।
इनका कहना है ----
वित्त विभाग की टीम द्वारा 10 दिनों तक जांच की गई थी यह गवन का अत्यन्त गंभीर मामला है, इसकी जांच कर प्रतिवेदन हमारे द्वारा जिला कलेक्टर एवं जिला पुलिस अधीक्षक को सौपा गया था।
रोहित सिंह कौशल, अपर संचालक, वित्त विभाग, जबलपुर
वित्त विभाग जबलपुर की जांच के आधार पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी द्वारा FIR दर्ज कराई गई है विभिन्न धारा 319/24, 420, 406, 409, 120बी, 467, 468, 471, आईपीसी, 74 आईटी एक्ट ते तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है, विवेचना जारी है।
राकेश सिंह बघेल
थाना प्रभारी जुन्नारदेव

