सच की आंखें उमरेठ जिस गाय के दूध को अमृत कहते हैं जो नवजात के लिए मां के आंचल का विकल्प बनता है दुध डेयरी में आज उसी का दाम 50 रुपये लीटर है वहीं हर मजरे टोले में बिना लाइसेंस की पक्की शराब 200 रुपये पाव तक बेखौफ बिक रही है शराब बेचने वाला मालामाल हो रहा है और दूध बेचने वाला किसान परेशान है। यह चिंता का विषय है आने वाला समय और परिस्थिति को देखते हुए हम सभी को निर्णय लेने की आवश्यकता है सही और गलत को पहचानने की आवश्यकता है।
किसान गाय भैंस को अपने बच्चे सा पालता है सुबह शाम दूध डेयरी पहुंचाता है चारा भूसा दवा की लागत निकालना मुश्किल है अच्छी क्वालिटी पर भी 50 रुपये लीटर से ज्यादा नहीं मिलता
उमरेठ तहसील के कुछ ट्राइबल क्षेत्र है यहां कुछ गरीब तबके के लोग परंपरागत रूप से सीमित मात्रा में कच्ची शराब बनाते हैं दिन भर खेत मजदूरी के बाद शाम को 100 से 150 रुपये बोतल में यह उनके लिए सुलभ है उनकी मेहनत और मजबूरी को समझना जरूरी है असली संकट बड़े पैमाने पर बिक रही अवैध पक्की शराब का है
लाइसेंसी दुकान अपनी जगह है पर गांव गांव में बिना लाइसेंस पक्की शराब का कारोबार चल रहा है एमआरपी से दोगुने दाम वसूलकर कानून को खुली चुनौती दी जा रही है
आबकारी विभाग और स्थानीय थाना चौकी पुलिस अवैध शराब के विरुद्ध लगातार कार्रवाई कर रही है कई जगह आबकारी एक्ट में प्रकरण बनाकर आरोपियों को जेल भेजा गया है छापे और जब्ती जारी हैं विभाग का साफ कहना है कि कानून तोड़ने वाला बख्शा नहीं जाएगा
क्षेत्र के जनप्रतिनिधि पशुपालन बचाने के लिए कई बार लिखित शिकायत दे चुके हैं उनका कहना है कि अवैध पक्की शराब युवाओं को बर्बाद कर रही है जबकि दूध उत्पादक किसान घाटे में है
सबसे बड़ा सवाल यही है कि कार्रवाई के बाद भी पक्की शराब का नेटवर्क गांव तक कैसे पहुंच रहा है जो दूध जीवन देता है वह 50 रुपये लीटर और जो नशा घर उजाड़ता है वह 200 रुपये पाव क्यों बिक रहा है शराब बेचने वाला मालामाल और दूध बेचने वाला किसान परेशान यह कैसा न्याय है
प्रशासन द्वारा एक चुनौती अवैध शराब बेचते पाए जाने पर आबकारी एक्ट के तहत शराब जप्त कर कार्रवाई की जाएगी कच्ची शराब पर नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी पर प्राथमिकता अवैध पक्की शराब के कारोबार को तोड़ना है शासन अपनी प्राथमिकता को समझते हुए युवाओं को नशे से बचाने और किसान को उसका हक दिलाने के लिए सख्त कदम उठाएगा
फैसला अब गांव के हर जन मानस को करना है दूध बेचने वाले किसान को उसका हक मिले और शराब बेचने वालों को खुली चुनौती है कि कानून के शिकंजे से बच नहीं पाओगे दूध को सम्मान नशे पर लगाम तभी बदलेगा गांव क्षेत्र और आने वाली पीढ़ी को बचाना है तो आगे आना होगा।
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