निर्माण कार्य अटके, मूल्यांकन लंबित, पंचायत प्रतिनिधियों में नाराजगी
👆
लगातार शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं, क्या उपयंत्री पर मेहरबान हैं जिम्मेदार अधिकारी.....🤔?
क्या उच्च अधिकारियों की शह पर उपयंत्री की मनमानी? दो पंचायतों ने खोला मोर्चा
सच की आंखें न्यूज़ अमरवाड़ा, 3 जून 2026। ग्रामीण विकास की योजनाएं जमीन पर उतरें, इसके लिए शासन करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है, लेकिन यदि जिम्मेदार अधिकारी ही समय पर उपलब्ध न हों तो विकास कार्यों की रफ्तार पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। ऐसा ही मामला जनपद पंचायत अमरवाड़ा के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सिंगोड़ी और खामीहीरा से सामने आया है, जहां सरपंचों और पंचायत प्रतिनिधियों ने उपयंत्री वीरेन्द्र गोतमारे के विरुद्ध मुख्य कार्यपालन अधिकारी को लिखित शिकायत सौंपकर गंभीर आरोप लगाए हैं।
ग्राम पंचायत सिंगोड़ी के सरपंच एवं सचिव द्वारा 1 जून 2026 को दिए गए आवेदन में उल्लेख किया गया है कि उपयंत्री पिछले लगभग 15 दिनों से पंचायत क्षेत्र में उपस्थित नहीं हुए हैं। शिकायत के अनुसार पंचायत में मत्स्य विभाग का स्मार्ट फिश पार्लर, नाली निर्माण सहित कई कार्य चल रहे हैं, लेकिन कथित रूप से न तो निरीक्षण किया गया और न ही आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया गया। पंचायत का कहना है कि कई कार्य पूर्णता की स्थिति में हैं, फिर भी मूल्यांकन लंबित है, जिससे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि भीषण गर्मी के चलते जल संकट की स्थिति बनने पर कूप निर्माण के लिए प्राक्कलन की मांग की गई थी, लेकिन पंचायत प्रतिनिधियों के अनुसार अब तक आवश्यक कार्रवाई नहीं हुई। वहीं पानी निकासी के लिए बनाए गए शोकपिट के प्राक्कलन को लेकर भी लगातार मांग किए जाने का दावा किया गया है।इधर ग्राम पंचायत खामीहीरा के सरपंच दौलतराम धुर्वे ने 2 जून 2026 को सीईओ जनपद पंचायत को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि पंचायत के कई निर्माण कार्यों का मूल्यांकन अब तक नहीं हुआ है। शिकायत में सामुदायिक भवन, सीमेंट सड़क और अन्य विकास कार्यों का उल्लेख किया गया है। आवेदन में यह भी दावा किया गया है कि संबंधित अधिकारी द्वारा फोन रिसीव नहीं किया जाता और कार्यों में अनावश्यक विलंब हो रहा है।
दो अलग-अलग पंचायतों से लगभग एक जैसी शिकायतें सामने आने के बाद ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर विकास कार्यों की निगरानी और तकनीकी स्वीकृतियों की जिम्मेदारी समय पर क्यों पूरी नहीं हो रही। हालांकि शिकायतों में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित उपयंत्री का पक्ष प्राप्त होना शेष है।
अब निगाहें जनपद पंचायत अमरवाड़ा प्रशासन पर टिकी हैं। यदि शिकायतों में वर्णित तथ्य सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल एक अधिकारी की कार्यशैली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ग्रामीण विकास योजनाओं की मॉनिटरिंग व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करेगा।
मनेश पत्रकार आपसे पूछता है…
यदि किसी पंचायत में सरपंच, सचिव और ग्रामीण लगातार शिकायत कर रहे हों और विकास कार्य प्रभावित हो रहे हों, तो क्या ऐसे मामलों में उच्च अधिकारियों को तत्काल जांच कर जिम्मेदारी तय करनी चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।यह संस्करण आरोपों को "कथित", "शिकायत के अनुसार", "आवेदन में उल्लेख" जैसी सुरक्षित भाषा में रखता है, जिससे खबर प्रभावी भी रहती है और कानूनी रूप से संतुलित भी।
0 टिप्पणियाँ