ग्रीष्मकालीन तिल की खेती बनी किसानों के लिए लाभ का सौदा, थुर्रेमेटा के कृषक ने पेश की मिसाल


     सच की आंखें

बालाघाट जिले में कृषि विभाग द्वारा किसानों को उन्नत खेती के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब खेतों में दिखाई देने लगे हैं। बिरसा विकासखंड के ग्राम थुर्रेमेटा के प्रगतिशील कृषक श्री शंकरलाल उइके ने कृषि विभाग से प्रदाय तिल प्रदर्शन कार्यक्रम के अंतर्गत ग्रीष्मकालीन जायद मौसम में तिल की खेती कर एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।

      कृषक श्री उइके के खेत में तिल की फसल वर्तमान में अत्यंत अच्छी स्थिति में है। फसल की बढ़वार, पौधों का विकास एवं खेत की समग्र स्थिति को देखकर अच्छे उत्पादन की संभावना व्यक्त की जा रही है। कृषक ने बताया कि कृषि विभाग के मार्गदर्शन एवं तकनीकी सलाह के अनुसार समय पर बुवाई, सिंचाई तथा आवश्यक कृषि कार्य किए गए, जिसके परिणामस्वरूप फसल बेहतर अवस्था में पहुंची है।

      श्री शंकरलाल उइके ने ग्रीष्मकालीन तिल की खेती को लाभकारी बताते हुए कहा कि पारंपरिक फसलों के साथ तिल जैसी तिलहनी फसलों को अपनाकर किसान अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं। उन्होंने अन्य किसानों से भी कृषि विभाग द्वारा संचालित प्रदर्शन कार्यक्रमों का लाभ उठाने और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने की अपील की।

       उप संचालक कृषि श्री फूलसिंह मालवीय ने बताया कि तिल एक महत्वपूर्ण तिलहनी फसल है, जिसकी बाजार में अच्छी मांग रहती है। कम लागत और बेहतर मूल्य मिलने के कारण यह किसानों के लिए आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन रही है। विभाग द्वारा किसानों को उन्नत बीज, तकनीकी मार्गदर्शन एवं प्रदर्शन कार्यक्रमों के माध्यम से प्रोत्साहित किया जा रहा है।

        ग्राम थुर्रेमेटा में श्री शंकरलाल उइके के खेत में लहलहाती तिल की फसल क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है। यह उदाहरण दर्शाता है कि वैज्ञानिक पद्धति और कृषि विभाग के सहयोग से किसान कम संसाधनों में भी बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।

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