रिसर्च और अकादमिक क्षेत्रों को बदल देगा एआईः प्रो गणपति एसएमसीयू में एआई एफडीपी का सातवां दिन”

chif editor MANESH SAHU 9407073701
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सच की आँखे

भोपाल। एआई का क्षेत्र तेजी से विस्तार ले रहा है। आज जेनेरेटिव एआई से लेकर एजेंटिंक और मल्टी एजेंटिंक एआई पर रिसर्च चल रहा है। इसके कारण हर क्षेत्र में बहुत कुछ बदल रहा है। काम करने की गति और उसकी गुणवत्ता में अभूतपूर्व सुधार हुए हैं। मीडिया और क्रिएटिव इंडस्ट्री एआई के कारण बहुत ही तेजी से बदल रही है। हाल के एक ताजा रिसर्च में पता चला है कि दुनियाभर में 97 प्रतिशत प्रकाशन अपने न्यूज और कंटेट डिस्ट्रिब्यूशन के लिए बैकएंड पर एआई का उपयोग कर रहे हैं। एमसीयू में चल रहे एआई एफडीपी में आज पहले सत्र में एनआईटीटीटीआर भोपाल के प्रोफेसर डा. गणपति एस. ने कही। वे एजेंटिक एआई और मल्टी एजेंट आर्केस्ट्रेशन पर बोल रहे थै।

डा. गणपति ने कहा कि एआई के पास किसी समस्या की पहचान करके उसके संभावित समाधान देने की क्षमता है। इसके साथ काम करने के लिए एआई की समझ होनी चाहिए। यह हमारे सहयोगी की तरह है। जिस तरह की कमांड इसे हम देंगे, यह उसी तरह के परिणाम हमें देगा। उन्होंने कहा कि आज होम एप्लाएंस भी एआई से लैस आ रहे हैं। एडवांस तकनीक ने यह संभव कर दिया है कि हमारे रोजमर्रा के जीवन के कई छोटे-मोटे काम एआइ  आसानी से कर ले रहा है। ऐसे में हमें इसके साथ काम करना आना आवश्यक है। अकादमिक और रिसर्च के क्षेत्रों में एआई बहुत मददगार साबित हो रहा है। डाॅ  गणपति ने कहा कि आइडिएशन से लेकर ठोस एब्सट्रैक्ट लिखने तक यह बहुत जल्दी बहुत बेहतर काम कर सकता है। ऐसे में एकेडमिक सेक्टर में इसका खूब उपयोग हो रहा है।

आज के दूसरे सत्र में बतौर विशेषज्ञ श्री जयप्रकाश पराशर ने सिंथेटिक मीडिया और डीपफेक पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आज डिजिटल मीडिया और मार्केट में कई वर्चुअल इन्फ्लुएंसर्स मौजूद हैं। वास्तविक दुनिया में उनका कोई अस्तित्व नहीं है लेकिन उनको लाखों-करोड़ों लोग फालो करते हैं। यह एआई का ही कमाल है कि वे वर्चुअल असिस्टेंट, न्यूजरूम, एंकर जैसी बातें आज सिर्फ कल्पना नहीं रह गई हैं बल्कि यह सब हर क्षेत्र में काम करते दिख रहे हैं।

  श्री पराशर ने कहा कि डीप फेक को समझने के लिए डिजिटल साक्षरता भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि न्यूज इंडस्ट्री में किसी भी खबर को लोगों तक पहुंचाने से पहले उसके तथ्यों का वेरिफिकेशन बहुत आवश्यक है। मीडिया और कम्युनिकेशन प्रोफेशनल्स को इस तरह के काम करने में एआई के कई टूल्स बहुत मददगार साबित होते हैं। इस अवसर पर श्री पराशर ने डीपफेक के विविध प्रकार, मेटाडेटा एनालिसिस सहित न्यूजरूम एसओपी आदि पर विस्तार से चर्चा की।इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सभी विभागों के शिक्षक उपस्थित थे।

इस एफडीपी के आगामी दिनों में आयोजित सत्रों में एआई और जेनरेटिव कंटेंट, एआई न्यूजरूम आर्किटेक्चर, एआई एथिक्स सहित कई अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर देश के जाने-माने विशेषज्ञ प्रतिभागियों को प्रशिक्षण देंगे।

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