सच की आँखे छिंदवाड़ा।कहते हैं कि अगर हौसलों में उड़ान हो और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो कोई भी मुकाम हासिल करना नामुमकिन नहीं है। इसे सच कर दिखाया है छिंदवाड़ा की होनहार बेटी अंकिता शर्मा ने। अंकिता ने कानून (Law) की उच्च शिक्षा पूरी कर आधिकारिक तौर पर एडवोकेट (अधिवक्ता) की उपाधि हासिल कर ली है। उनकी इस ऐतिहासिक सफलता से पूरे जिले और उनके गृहग्राम में हर्ष का माहौल है।
बचपन से था न्याय प्रणाली में जाने का सपनाअंकिता शर्मा शुरुआत से ही पढ़ाई-लिखाई में मेधावी रही हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय स्कूल से पूरी की। अंकिता बताती हैं कि समाज में गरीबों और शोषितों को न्याय दिलाने की ललक उनमें बचपन से ही थी। इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने कानून की पढ़ाई को अपना करियर चुना। दिन-रात की कड़ी मेहनत और कानूनी दांव-पेचों को बारीकी से समझने के बाद, उन्होंने बार काउंसिल की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया और काले कोट को अपने स्वाभिमान के रूप में धारण किया।
परिवार और समाज में दौड़ी खुशी की लहरअंकिता की इस बड़ी कामयाबी पर उनके माता-पिता की आंखें खुशी से छलक उठीं। परिवार का कहना है कि अंकिता ने हमेशा सीमित संसाधनों के बावजूद कभी अपनी पढ़ाई से समझौता नहीं किया। जैसे ही अंकिता के एडवोकेट बनने की खबर क्षेत्र में फैली, उनके निवास पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रबुद्ध नागरिकों ने इसे 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान की एक सच्ची और जीवंत मिसाल बताया है।
*"गरीबों और पीड़ितों को न्याय दिलाना मेरी पहली प्राथमिकता— अंकिता शर्मा*
*अपनी इस सफलता पर एडवोकेट अंकिता शर्मा ने कहा:*
"यह सिर्फ मेरी सफलता नहीं है, बल्कि मेरे माता-पिता के अटूट विश्वास की जीत है। एक वकील के रूप में मेरा मुख्य उद्देश्य न्यायालय के माध्यम से समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक न्याय पहुंचाना होगा। मैं विशेष रूप से महिलाओं और असहाय लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहूंगी।"
*बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा स्रोत*
छिंदवाड़ा जैसे उभरते शहर से निकलकर न्याय के क्षेत्र में मुकाम बनाना युवाओं, खासकर लड़कियों के लिए एक बड़ा संदेश है। अंकिता की यह कहानी साबित करती है कि अगर बेटियां ठान लें, तो वे किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं। आज छिंदवाड़ा को अपनी इस लाडली पर गर्व है।
