सच की आँखे परासिया चंदामेटा निवासी उपेन्द्र वाजपेयी पिता स्व. गोवर्धन वाजपेयी निवासी चांदामेटा बाजार रोड, वार्ड क. 11, तहसील परासिया, जिला छिन्दवाड़ा का निवासी हूँ, मेरी पत्ति कांमना वाजपेयी उम्र 38 वर्ष महोदय जी मेरी पत्नि के गाल एवं जबड़े में दर्द, दाढ़ में कालापन था, जिसके इलाज के लिये वह चांदामेटा के डॉक्टर अंकुर बेलवंशी बी.डी.एस. डॉक्टर जो कि शासकीय चिकित्सक भी है उनके प्राईवेट क्लीनिक संजीवनी हेल्थकेयर में गई थी वहां पर मेरी पत्नि के जबडे और मुह में इंजेक्शन को कई बार लगाया था, जिससे गाल एवं जबड़े में गंभीर घाव हो गये थे, डॉक्टर का कहना था कि यह इंजेक्शन लगभग एक से दो महीने तक लगवाने पड़ेंगे, सप्ताह में दो बार इंजेक्शन लगाये जाते थे, इंजेक्शन सामने मेडिकल (अपना मेडिकल स्टोर) के संचालक को फोन करके इंजेक्शन बुलवाता था, मेडिकल वाला इंजेक्शन लाकर डॉक्टर के हाथ में देता था, डॉक्टर कौनसा इंजेक्शन दे रहा और क्यों दे रहा इसकी जानकारी परिजनों को नहीं दी जाती थी, इलाज के दौरान की लापरवाही से मेरी पत्नी की हालत गंभीर हो गई थी, मेरी पत्नी के गाल एवं जबड़े में गंभीर घाव हो गये थे, जिसके बाद डॉक्टर अंकुर बेलवंशी ने इलाज लगाई गई हर इंजेक्शन के 600 रूपये शुल्क लेता था, जिसकी कोई रसीव एवं पर्ची नहीं देता था व मेरी पत्नि की पर्ची में इंजेक्शन का कोई उल्लेख नहीं हैं केवल एक ही बार डॉक्टर ने मेरी पत्नि को पर्ची बनाकर दिया था।
महोदय जी मेरी पत्नि की हालत गंभीर होने की स्थिति में डॉक्टर टालमटोली करने लगा तब मुझे मजबूर होकर छिन्दवाड़ा के चिकित्सक डॉक्टर सुधीर शुक्ला को दिखाना पड़ा तो उन्होनें मरीज की स्थिति को देखकर उचित इलाज कर सलाह दी एवं कहा कि कैंसर की संभावना हैं आप इन्हें मेडिकल कॉलेज जबलपुर बलपुर ले जाइये तब उन्होनें पर्ची में स्पष्ट रूप से मेडिकल कॉलेज को हिन्दी में रेफर किया, तदोपरांत मैंने उनसे आग्रह किया सर क्या मैं भोपाल या नागपुर ले जा सकता हूँ तो उन्होनें कहा ले जा सकते हो।
महोदय जी भोपाल के जवाहरलाल नेहरू कैंसर हॉस्पिटल में मेरी पत्नि की वायोप्सी की गई जिसकी रिपोर्ट में जबड़े एवं गाल के कैंसर की पुष्टि हुई, महोदय जी यदि गलत इलाज के बाद भी समय रहते डॉक्टर अंकुर बेलवंशी भी मरीज की स्थिति को देखते हये, उसे योग्य डॉक्टर एवं हॉस्पिटल रेफर कर देता तो मेरी पत्नि कामना की जान बचाई जा सकती थी।
महोदय जी मैंने डॉक्टर के द्वारा मेरी पत्नि के किये गये इलाज की संपूर्ण जानकारी एवं रिपोर्ट माननीय कलेक्टर महोदय, एसपी महोदय, मुख्य चिकित्सक महोदय, थाना प्रभारी को भी आवेदन दिया था जिस पर किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं हई है. सभी जांच का हवाला दे रहे हैं. थाना प्रभारी जी के पास समस्त जानकारी डॉक्टर अंकुर बेलवंशी के खिलाफ होने के बाद भी हमारी एफआईआर नहीं लिख रहे हैं। महोदय जी मेरी पत्नि ने मृत्यु के पहले डॉक्टर अंकुर बेलवंशी के खिलाफ दिये गये बयान को पेन्डाईव में रिपोर्ट के साथ कलेक्टर कार्यालय में भी जमा किया है जो कि डाईंग डिक्लेरेशन जिस पर आज तक कलेक्टर महोदय जी द्वारा कोई संज्ञान नहीं लिया गया हैं. क्या मेरी पत्नि के बयान कोई मायने नहीं रखते हैं। महोदय जी मेरे परिवार में मेरी पत्नि के अलावा मेरी दो छोटी-छोटी बेटी
