धान, ज्वार और बाजरा उपार्जन के लिए किसान पंजीयन 15 सितंबर से
10 अक्टूबर तक चलेगी पंजीयन प्रक्रिया, जिले में बनाए गए 24 पंजीयन केंद्र
छिंदवाड़ा। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर धान, ज्वार एवं बाजरा उपार्जन के लिए किसानों के पंजीयन की प्रक्रिया 15 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर तक चलेगी। जिले में किसान पंजीयन के लिए 24 पंजीयन केंद्र बनाए गए हैं।
पंजीयन केंद्रों पर किसानों के लिए निःशुल्क पंजीयन की सुविधा उपलब्ध रहेगी। आवश्यकता के अनुसार ग्राम पंचायत, जनपद एवं तहसील कार्यालयों में स्थापित सुविधा केंद्रों पर भी निःशुल्क पंजीयन कराया जा सकेगा। इसके अलावा एमपी ऑनलाइन, कॉमन सर्विस सेंटर, लोकसेवा केंद्र एवं निजी साइबर कैफे के माध्यम से अधिकतम 50 रुपये शुल्क देकर भी पंजीयन कराया जा सकेगा।
सिकमी, बटाईदार, कोटरवार एवं वन पट्टाधारी किसानों का पंजीयन केवल संबंधित सहकारी समिति के अंतर्गत संचालित पंजीयन केंद्रों पर किया जाएगा। पंजीयन के लिए किसानों को आधार लिंक बैंक खाता, समग्र आईडी, भूमि संबंधी दस्तावेज एवं आवश्यक रिकॉर्ड साथ लेकर जाना होगा। पंजीयन बायोमेट्रिक सत्यापन अथवा आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी के माध्यम से किया जाएगा।
किसान का पंजीयन तभी मान्य होगा, जब भू-अभिलेख/एग्रीस्टेक में भूमि के खाते एवं खसरे में दर्ज नाम का मिलान आधार कार्ड में दर्ज नाम से होगा। नाम में विसंगति होने पर तहसीलदार या नायब तहसीलदार द्वारा सत्यापन के बाद पंजीयन मान्य किया जाएगा।
वनाधिकार पट्टाधारी किसानों के लिए वन पट्टा तथा सिकमी/बटाईदार किसानों के लिए निर्धारित प्रारूप में पंजीकृत सिकमी/बटाई अनुबंध 15 सितंबर से पहले का होना आवश्यक है। अनुबंध की अवधि अधिकतम पांच वर्ष निर्धारित है। इससे अधिक अवधि का अनुबंध पंजीयन के लिए मान्य नहीं होगा।
किसान पंजीयन का सत्यापन संबंधित नायब तहसीलदार, तहसीलदार एवं अनुविभागीय अधिकारी राजस्व द्वारा 21 सितंबर से 15 अक्टूबर तक किया जाएगा। किसान द्वारा बोई गई फसल की ई-गिरदावरी होना भी अनिवार्य है। ई-गिरदावरी के आधार पर ही ई-उपार्जन पोर्टल पर किसान पंजीयन किया जाएगा।
कलेक्टर हरेंद्र नारायन ने संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को किसान पंजीयन की आवश्यक तैयारियां समय से पूर्ण करने तथा किसानों के बीच पंजीयन प्रक्रिया का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही वनाधिकार पट्टाधारी एवं सिकमी/बटाईदार किसानों से अपील की गई है कि वे निर्धारित प्रारूप में आवश्यक अनुबंध समय पर तैयार करा लें, ताकि पंजीयन में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
