मध्यप्रदेश हिन्दी में एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू करने वाला देश का पहला राज्य
छिंदवाड़ा। राष्ट्रीय हिन्दी दिवस के अवसर पर हिन्दी भाषा के महत्व और चिकित्सा शिक्षा में भारतीय भाषाओं के प्रयोग को रेखांकित करते हुए कहा गया कि मध्यप्रदेश ने हिन्दी माध्यम में एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बनकर ऐतिहासिक पहल की है। यह पहल चिकित्सा शिक्षा को विद्यार्थियों के लिए अधिक सहज, सुलभ और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी गई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के माध्यम से भारतीय भाषाओं में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है। इसी दिशा में मध्यप्रदेश ने चिकित्सा शिक्षा को हिन्दी माध्यम में उपलब्ध कराने की पहल की। इसका उद्देश्य हिन्दी को अंग्रेजी के विरोध में खड़ा करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की भाषा को उनकी शिक्षा में प्रभावी माध्यम बनाना है।
16 अक्टूबर 2022 को भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में हिन्दी में एमबीबीएस की पुस्तकों का विमोचन किया गया। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में प्रथम वर्ष की हिन्दी पुस्तकों का विमोचन हुआ और चिकित्सा शिक्षा में हिन्दी माध्यम के नए अध्याय की शुरुआत हुई।
हिन्दी में एमबीबीएस पाठ्यक्रम तैयार करना सामान्य अनुवाद से अलग चुनौतीपूर्ण कार्य था। चिकित्सा विज्ञान की तकनीकी शब्दावली और जटिल अवधारणाओं को वैज्ञानिक रूप से सही और विद्यार्थियों के लिए सरल भाषा में प्रस्तुत करने के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत हिन्दी पाठ्यक्रम प्रकोष्ठ का गठन किया गया। विशेषज्ञों की टास्क फोर्स के माध्यम से पाठ्यक्रम और पुस्तकों को तैयार किया गया।
चिकित्सा शिक्षा की इस प्रक्रिया को संस्थागत रूप देने के लिए हिन्दी चिकित्सा प्रकोष्ठ ‘मंदार’ का गठन किया गया। विशेषज्ञों के लंबे परिश्रम के बाद एमबीबीएस की पुस्तकों को हिन्दी में उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य हुआ। प्रथम वर्ष के बाद द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ वर्ष की पुस्तकों के लिप्यंतरण और पाठ्यक्रम संबंधी कार्य भी आगे बढ़ाया गया।
मध्यप्रदेश की इस पहल के बाद छत्तीसगढ़, राजस्थान, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों ने भी हिन्दी में एमबीबीएस शिक्षा की दिशा में कदम बढ़ाए। इससे भारतीय भाषाओं में चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देने की राष्ट्रीय स्तर पर पहल को गति मिली।
इस अवसर पर कहा गया कि हिन्दी केवल बोलचाल की भाषा नहीं, बल्कि ज्ञान, विज्ञान, अनुसंधान, चिकित्सा, तकनीक और नवाचार की भाषा भी बन सकती है। हिन्दी में चिकित्सा शिक्षा की शुरुआत का उद्देश्य ग्रामीण, गरीब और सामान्य परिवारों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा को अधिक सहज बनाना है, ताकि भाषा उनकी प्रतिभा और डॉक्टर बनने के सपने में बाधा न बने।
राष्ट्रीय हिन्दी दिवस के अवसर पर हिन्दी और अन्य भारतीय भाषाओं को शिक्षा तथा ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में निरंतर सशक्त बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया गया। साथ ही देशवासियों और हिन्दी प्रेमियों को हिन्दी दिवस की शुभकामनाएं दी गईं।
