अजयगढ़ में 'सूली सत्याग्रह' के साथ तेज हुआ आंदोलन!!प्रशासन की अनदेखी से प्रभावितों का आक्रोश बढ़ा, लगे “मोदी-मोहन होश में आओ” के नारे!

अजयगढ़ में 'सूली सत्याग्रह' के साथ तेज हुआ आंदोलन!!
प्रशासन की अनदेखी से प्रभावितों का आक्रोश बढ़ा, लगे “मोदी-मोहन होश में आओ” के नारे!

राज्य का अपने ही बनाए कानूनों का पालन न करना चिंता का विषय : अमित भटनागर

अजयगढ़।। अजयगढ़ और पन्ना क्षेत्र में केन-बेतवा समेत विभिन्न विकास परियोजनाओं की भेंट चढ़ रहे विस्थापितों का आक्रोश अब विकराल रूप ले चुका है। चिता, मिट्टी और जल सत्याग्रह के बाद आंदोलन के 12वें दिन 'सूली सत्याग्रह' का अनूठा और आक्रामक आगाज करते हुए ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया है। “गांव डूब रहे हैं, घर डूब रहे हैं और जिंदगियां डूब रही हैं, लेकिन जिम्मेदारों की बेशर्मी तैर रही है”—अमित भटनागर के इन तीखे शब्दों ने स्पष्ट कर दिया है कि स्थानीय प्रशासन की उदासीनता अब जनता के सब्र का बांध तोड़ चुकी है। स्थिति यह है कि विरोध के स्वर अब स्थानीय अधिकारियों से होते हुए सीधे शीर्ष नेतृत्व तक जा पहुंचे हैं और आंदोलन स्थल पर गूंजते “मोदी-मोहन होश में आओ” के नारे सरकार के लिए सीधी चेतावनी बन गए हैं।

परियोजना प्रक्रिया के 15 साल बीत जाने के बावजूद मुआवजे और पुनर्वास के मामलों का अधर में लटकना न केवल प्रशासनिक विफलता को उजागर करता है, बल्कि खुद सरकार के बनाए कानूनों की धज्जियां उड़ा रहा है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि उचित मूल्यांकन और कानूनी अधिकारों का पालन किए बिना गांवों को डुबोने की साजिश रची जा रही है, और विरोध करने पर नोटिस देकर लोकतंत्र का गला घोंटने का प्रयास किया जा रहा है। डूब क्षेत्र के इन अंचल में भड़की यह चिंगारी अब केवल मुआवजे की मांग नहीं, बल्कि पीड़ितों के अस्तित्व की अंतिम और निर्णायक आर-पार की लड़ाई बन चुकी है, जिस पर सरकार यदि समय रहते नहीं चेती तो यह जन-आंदोलन और भी ज्यादा विस्फोटक रूप ले सकता है।

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