युवा शिकायत नहीं, समस्याओं का समाधान देता है : मुकुल कानिटकर
एमसीयू में स्वामी विवेकानंद के शिकागो व्याख्यान की स्मृति में ‘युवा भारत : कल, आज और कल’ विषय पर विशेष व्याख्यान
भोपाल। “कौन हो तुम, कहां से आए हो और तुम्हारे जीवन का उद्देश्य क्या है? जो इन प्रश्नों का सामना कर उनके उत्तर खोजता है, वही वास्तविक अर्थों में युवा है।” यह विचार प्रखर वक्ता मुकुल कानिटकर ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (एमसीयू) में व्यक्त किए।
स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक शिकागो व्याख्यान की स्मृति में आयोजित विशेष कार्यक्रम में ‘युवा भारत : कल, आज और कल’ विषय पर उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने की। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने विभिन्न विषयों पर सवाल पूछे, जिनका वक्ता ने समाधान किया।
शिकागो व्याख्यान ने दुनिया को दिया भारत का नया परिचय
मुकुल कानिटकर ने कहा कि शिकागो धर्म सम्मेलन में स्वामी विवेकानंद के संबोधन के दौरान लंबे समय तक तालियां बजती रहीं। उन्होंने कहा कि इसकी वजह केवल उनका आत्मीय संबोधन नहीं था, बल्कि उनके व्यक्तित्व और भावपूर्ण अभिव्यक्ति में निहित शक्ति थी।
उन्होंने कहा कि अमेरिका पहुंचने के बाद स्वामी विवेकानंद ने कठिन परिस्थितियों और तिरस्कार का सामना किया, लेकिन मंच मिलने पर उन्होंने शिकायत करने के बजाय आत्मीयता के साथ अपना संबोधन शुरू किया। कानिटकर ने कहा कि कमजोर व्यक्ति शिकायत करता है, जबकि युवा समस्याओं का समाधान खोजता है। यही साहस और सकारात्मक दृष्टिकोण स्वामी विवेकानंद को आज भी युवाओं का प्रेरणास्रोत बनाता है।
उन्होंने स्वामी विवेकानंद के पश्चिमी देशों में कार्यों पर हुए शोध का उल्लेख करते हुए उनके विचारों और प्रभाव की व्यापकता पर प्रकाश डाला।
युवाओं से सेवा और जिम्मेदारी का आह्वान
कानिटकर ने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए युवाओं से भारत को केवल देश नहीं, बल्कि अपनी मातृभूमि के रूप में देखने और उसकी समस्याओं के समाधान के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और समाज सेवा को व्यक्तिगत जिम्मेदारी से जोड़ने की बात कही।
उन्होंने युवाओं से खरीदारी के दौरान स्वदेशी अथवा मित्र देशों के उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील की। आधुनिकता को परिभाषित करते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक और उपकरण आधुनिक हो सकते हैं, लेकिन संस्कृति अपनी निरंतरता के साथ आगे बढ़ती है। युवाओं को अपनी संस्कृति का संरक्षण करते हुए विचारों में आधुनिक बनने की आवश्यकता है।
सकारात्मक समाचार समाज को देते हैं प्रेरणा
पत्रकारिता के संदर्भ में उन्होंने कहा कि सकारात्मक घटनाओं को समाचार के रूप में सामने लाने के लिए पत्रकार को विशेष दृष्टि और मेहनत की आवश्यकता होती है। नकारात्मक घटनाएं आसानी से समाचार बन जाती हैं, लेकिन समाज को प्रेरित करने वाली अच्छी खबरों को सामने लाने के लिए प्रयास करना पड़ता है।
कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने स्वागत एवं अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि 11 सितंबर 1893 को अमेरिका में स्वामी विवेकानंद के संबोधन ने दुनिया को भारत का नया परिचय दिया। उनके विचारों ने भारत के प्रति वैश्विक दृष्टिकोण को प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि पत्रकार के रूप में भारत के विराट स्वरूप को समझने और देखने का अवसर मिलता है।
कार्यक्रम में स्वामी विवेकानंद के जीवन पर केंद्रित फीचर लेखन एवं प्रश्नावली प्रतियोगिता के विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया गया। संचालन पत्रकारिता विभाग की छात्रा अनन्या एवं जनसंचार विभाग की छात्रा सुमेधा ने किया। आभार ज्ञापन कुलसचिव प्रो. पी. शशिकला ने किया।
