सिवनी जिला अस्पताल में 46 बच्चों की मौत का मामला: ब्लू क्रॉस ब्लू क्रीसेंट मूवमेंट ने लिया संज्ञान
तीन माह में एसएनसीयू वार्ड में 46 बच्चों की मौत के मामले में निष्पक्ष जांच, प्रत्येक मृत्यु की समीक्षा और जिम्मेदारी तय करने की मांग
सिवनी। जिले के शासकीय इंदिरा गांधी जिला चिकित्सालय के स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) में तीन माह के दौरान 46 बच्चों की मौत होने के मामले को लेकर स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। इस मामले में ब्लू क्रॉस ब्लू क्रीसेंट मूवमेंट के दिल्ली मुख्यालय ने संज्ञान लेते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों तथा जिला प्रशासन को पत्र लिखकर आवश्यक कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
विधायक के निरीक्षण के बाद मामला आया चर्चा में
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सिवनी विधानसभा क्षेत्र के विधायक दिनेश राय द्वारा जिला अस्पताल का आकस्मिक निरीक्षण किए जाने के दौरान यह मामला सामने आया था। बताया गया है कि विधायक ने बच्चों की मौत के मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर स्थिति से अवगत कराया था। इसके अलावा उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी मुलाकात कर मामले की ओर ध्यान आकर्षित किया था।
इस प्रकरण को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा भी स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की मांग करते हुए प्रदर्शन किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, बच्चों की मौत के वास्तविक कारणों और किसी प्रकार की चिकित्सकीय या प्रशासनिक लापरवाही की पुष्टि निष्पक्ष जांच के बाद ही हो सकेगी।
ब्लू क्रॉस ब्लू क्रीसेंट मूवमेंट ने लिखा पत्र
संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (यूएन ईसीओएसओसी) से विशेष परामर्शदात्री दर्जा प्राप्त होने का उल्लेख करने वाले ब्लू क्रॉस ब्लू क्रीसेंट मूवमेंट के दिल्ली मुख्यालय ने इस मामले को मानवीय दृष्टिकोण से उठाया है। संगठन की ओर से केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे.पी. नड्डा, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और सिवनी जिला प्रशासन को पत्र लिखकर मामले में आवश्यक हस्तक्षेप की मांग की गई है।
संगठन के फाउंडर, डायरेक्टर जनरल सेक्रेटरी एवं चीफ एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर मिथिलेश कर्ण द्वारा संबंधित अधिकारियों को भेजे गए पत्रों में मामले की स्वतंत्र समीक्षा कराने और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का मूल्यांकन करने का आग्रह किया गया है।
प्रत्येक मृत्यु की समीक्षा और अभिलेखों की जांच की मांग
संगठन ने मांग की है कि एसएनसीयू में हुई प्रत्येक मृत्यु की अलग-अलग समीक्षा की जाए। इसके साथ ही मरीजों के उपचार से संबंधित अभिलेख सुरक्षित रखे जाएं, जांच निष्पक्ष तरीके से हो तथा स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी संभावित कमी की पहचान की जाए।
पत्र में प्रभावित बच्चों के परिजनों की बात सुनने, यदि किसी स्तर पर लापरवाही प्रमाणित होती है तो जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने और जांच की समय-सीमा निर्धारित करने जैसे बिंदु भी उठाए गए हैं। संगठन ने यथासंभव 30 दिनों के भीतर समीक्षा और कार्रवाई की समय-सीमा तय करने, राज्य एवं केंद्र के बीच समन्वय स्थापित करने तथा लागू नियमों और गोपनीयता संबंधी प्रावधानों के तहत निष्कर्षों का सार सार्वजनिक करने का अनुरोध किया है।
स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता की आवश्यकता
जिला अस्पताल के एसएनसीयू में बच्चों की मौत का मामला संवेदनशील है। ऐसे मामलों में मृत्यु के कारणों, उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, उपचार व्यवस्था और संबंधित रिकॉर्ड की विशेषज्ञों के माध्यम से समीक्षा महत्वपूर्ण होती है। इससे वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने के साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जा सकते हैं।
अब संबंधित अधिकारियों की ओर से मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी। निष्पक्ष जांच और तथ्यात्मक निष्कर्ष सामने आने से ही बच्चों की मौत के कारणों तथा किसी संभावित लापरवाही की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
पत्रों का विवरण
- केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री को पत्र क्रमांक: "BCBCM/HQ/MOHFW/2026/1610-02", दिनांक 16 अक्टूबर 2026।
- मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र क्रमांक: "BC/HQ/MP-HEALTH/2026/1610-01", दिनांक 16 अक्टूबर 2026।
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