मक्का की कड़बी न जलाएं, पशु चारे के रूप में करें उपयोग
कृषि विभाग किसानों को फसल अवशेषों के संरक्षण और उचित प्रबंधन के लिए कर रहा प्रेरित
छिंदवाड़ा। कलेक्टर हरेंद्र नारायन के मार्गदर्शन में कृषि विभाग द्वारा किसानों को मक्का की कड़बी (फसल अवशेष) नहीं जलाने और इसका उपयोग पशुओं के चारे के रूप में करने के लिए जागरूक किया जा रहा है। विभाग ने किसानों से फसल कटाई के बाद खेतों में बची कड़बी को सुरक्षित एकत्रित कर पशु चारे के रूप में उपयोग करने की अपील की है।
चारे की उपलब्धता बनाए रखने में मिलेगी मदद
अल्पवर्षा के कारण आगामी रबी मौसम में गेहूं की बोवनी का रकबा कम रहने की संभावना है। ऐसी स्थिति में पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इसे देखते हुए मक्का की कड़बी का संरक्षण और सदुपयोग महत्वपूर्ण है। इससे पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलेगी और फसल अवशेषों का बेहतर उपयोग भी हो सकेगा।
उप संचालक कृषि मोरिस नाथ एवं परियोजना संचालक आत्मा धीरज ठाकुर ने किसानों से अपील की है कि मक्का की कटाई के बाद खेत में बची कड़बी को जलाने के बजाय एकत्रित कर सुरक्षित रखें और पशुओं के चारे के रूप में उपयोग करें।
फसल अवशेष जलाने से मिट्टी और पर्यावरण को नुकसान
कृषि विभाग के अनुसार, फसल अवशेष जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीवों को नुकसान पहुंच सकता है। इससे मृदा स्वास्थ्य भी प्रभावित हो सकता है।
विभाग ने किसानों से पर्यावरण संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मक्का की कड़बी का उचित प्रबंधन करने तथा उसे जलाने से बचने की अपील की है।