छिंदवाड़ा जिले में पराली और नरवाई जलाने पर प्रतिबंध
फसल अवशेष जलाने पर होगी वैधानिक कार्रवाई, बिना स्ट्रा रीपर या स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम के कंबाइन हार्वेस्टर चलाने पर भी होगी कार्रवाई
छिंदवाड़ा। खरीफ फसलों की कटाई के बाद खेतों में पराली एवं नरवाई जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी हरेंद्र नारायन ने प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत जारी आदेश के अनुसार, जिले की संपूर्ण राजस्व सीमा में खेतों में फसल अवशेष जलाना प्रतिबंधित रहेगा। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होकर आगामी आदेश तक प्रभावशील रहेगा।
कलेक्टर ने बताया कि फसल कटाई के बाद खेतों में बचे डंठल, पराली एवं नरवाई जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है। इससे मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीवाणु नष्ट होते हैं और भूमि की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है। वहीं, आग अनियंत्रित होने पर आसपास के खेतों में खड़ी फसलों, वनस्पति, जीव-जंतुओं और सार्वजनिक संपत्ति को भी नुकसान पहुंच सकता है।
सैटेलाइट से भी होगी निगरानी
कृषि विभाग के अनुसार, खरीफ मौसम 2026 में मक्का, धान सहित अन्य फसलों की कटाई के बाद पराली एवं नरवाई जलाने की घटनाओं की आशंका को देखते हुए निगरानी की जा रही है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा ऐसी घटनाओं की सैटेलाइट मैपिंग भी की जा रही है। फसल अवशेष जलाने पर रोक लगाने के लिए पर्यावरण संबंधी प्रावधानों के तहत उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
कलेक्टर ने किसानों से अपील की है कि वे फसल अवशेषों को जलाने के बजाय उनके उचित प्रबंधन के लिए वैकल्पिक कृषि यंत्रों एवं तकनीकों का उपयोग करें। रोटावेटर सहित अन्य कृषि यंत्रों की मदद से खेतों में बचे डंठलों का प्रबंधन किया जा सकता है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में भी मदद मिलती है।
बिना स्ट्रा रीपर के कंबाइन हार्वेस्टर चलाने पर कार्रवाई
आदेश के तहत जिले में संचालित कंबाइन हार्वेस्टर के साथ स्ट्रा रीपर अथवा स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम की उपलब्धता एवं उपयोग की निगरानी की जिम्मेदारी जिला परिवहन अधिकारी और सहायक कृषि अभियांत्रिकी को सौंपी गई है। संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि कंबाइन हार्वेस्टर का संचालन निर्धारित व्यवस्था के अनुसार हो। बिना स्ट्रा रीपर अथवा स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम के कंबाइन हार्वेस्टर चलाए जाने पर संबंधितों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जिले की राजस्व सीमा में खरीफ मौसम 2026 में लगाई गई मक्का, धान सहित अन्य फसलों की कटाई के बाद खेतों में बची पराली एवं नरवाई जलाना प्रतिबंधित रहेगा। आदेश का उल्लंघन करने पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 के अंतर्गत कार्रवाई की जा सकती है।
प्रशासन ने किसानों से पर्यावरण संरक्षण, मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने और आग से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए फसल अवशेष नहीं जलाने की अपील की है।