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देव उठनी ग्यारस के बाद से विवाह आयोजन प्रारंभ हो जाते हैं और कुछ विशेष तिथियों जैसे बसंत पंचमी, अक्षय तृतीया आदि के अवसर पर सामूहिक विवाह संपन्न होते हैं । इस परिप्रेक्ष्य में लाड़ो अभियान में बाल विवाह रोकने के लिये सामूहिक विवाह कराने वाले आयोजकों से अनुरोध किया गया है कि वें जिला महिला एवं बाल विकास कार्यालय छिंदवाड़ा में यह शपथ-पत्र प्रस्तुत करें कि वे अपने वैवाहिक आयोजनों में बाल विवाह नहीं करायेंगे ।
जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास श्रीमती कल्पना तिवारी रिछारिया ने बताया कि बाल विवाह अधिनियम में दण्ड प्रावधानों के अन्तर्गत 2 वर्ष का कारावास एवं एक लाख रूपये का जुर्माना अथवा दोनों ही दण्ड हो सकते हैं । उन्होंने प्रिटिंग प्रेस, हलवाई, केटरर, धर्म गुरू, समाज के मुखिया, बैंड वाला, घोड़ी वाला, ट्रांसपोर्ट वाला, ब्यूटी पार्लर, मंगल भवन संचालक आदि से अनुरोध किया है कि बालक-बालिका के उम्र संबंधी प्रमाण पत्र प्राप्त कर व परीक्षण के बाद ही सेवायें प्रदाय करें । बालक-बालिका की उम्र का प्रति परीक्षण जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल की अंकसूची या आंगनवाडी केन्द्र के रिकार्ड से करें तथा इन दस्तावेजों के अभाव में स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी मेडिकल प्रमाण पत्र को मान्य करें। साथ ही पूरे वर्ष बाल विवाह रोकने में शासन को सहयोग प्रदान करें ।


