जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री चौरसिया ने कार्यक्रम में कहा कि अधिकतर अपराधों में नशे का महत्वपूर्ण योगदान होता है। नशे की दशा में व्यक्ति के सोचने और समझने की क्षमता क्षीण हो जाती है, इसलिये सभी नशा त्यागने का संकल्प लें। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देश की जानकारी देते हुए बताया कि ऐसे बंदी जो जमानत का आदेश होने के बाद भी जमानत शर्तों को पूरा नहीं कर पाने के कारण जेल में निरूध्द हैं और जेल में रहने के दौरान अध्ययन कार्य जारी रखना चाहते हैं, वे अपना आवेदन जेल अधीक्षक को प्रस्तुत कर अपनी आगे की पढ़ाई जारी रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि जो बंदी निरक्षर हैं, वे पाठशाला में अक्षर ज्ञान प्राप्त करें और नियमित रूप से योग, प्राणायाम आदि का अभ्यास कर शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ्य रहें। उन्होंने निःशुल्क विधिक सहायता और नेशनल लोक अदालत के माध्यम से निराकृत होने वाले प्रकरणों की विस्तृत जानकारी भी दी।

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