![]() |
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.जी.सी.चौरसिया ने बताया कि अंदरूनी अवशिष्ट कीटनाशक छिड़काव कार्यक्रम 2023 के अंतर्गत जिले के विकासखंड पांढुर्णा के उप स्वास्य्क केन्द्र भूली द्वारा चिन्हित ग्राम सावजपानी में 16 जून से कीटनाशक का छिड़काव प्रारंभ कर दिया गया है जो 18 जून तक चलेगा । इसी प्रकार उप स्वास्य् केन्द्र नांदनवाड़ी द्वारा चिन्हित ग्राम गायखुरी में 19 व 20 जून को कीटनाशक का छिड़काव किया जायेगा । उन्होंने बताया कि जिले के विकासखंड बिछुआ के उप स्वास्य् केन्द्र मुंगनापार द्वारा ग्राम जैतपुर में 22 व 23 जून को और विकासखंड अमरवाड़ा के उप स्वास्य् केन्द्र बड़ेगांव द्वारा ग्राम बाबई में 25 से 30 जून तक कीटनाशक का छिड़काव किया जायेगा । उन्होंने बताया कि मलेरिया की दृष्टि से हाई रिस्क वाले एक ए.पी.आई.अर्थात एक हजार की जनसंख्या में एक या अधिक मलेरिया पॉजिटिव केसेज वाले ग्राम से अधिकता वाले क्षेत्रों जिनमें वर्ष 2017, 2019 व 2020 में कीटनाशक मच्छरदानी एल.एल.आई.एन.का वितरण नहीं हुआ है, ऐसे चिन्हित ग्रामों में कीटनाशक का छिड़काव किया जा रहा है ।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.चौरसिया ने बताया कि मलेरिया फैलाने वाले मच्छर अपने अण्डों को विकसित करने के लिये मनुष्य या जानवरों का खून हर 2 से 3 दिनों में रात के समय चूसते है। खून चूसने के बाद वे अपने घरों के अंदर ही 2 से 3 दिनों तक विश्राम करते हैं। घर के अंदर की दीवार, छत, बांस, बल्लियां कीटनाशक छिड़काव से सिंचित रहने पर मच्छर घर के अंदर नहीं आयेंगे व दीवार पर बैठते समय कीटनाशक के संपर्क में आने से मर जाते हैं। इस प्रकार घरों के अंदर छिड़काव करवाने से मच्छर व मलेरिया बुखार बचाव के साथ-साथ एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में मलेरिया के संक्रमण के प्रसार को रोका जा सकता है। उन्होंने बताया कि मलेरिया फैलाने वाले मच्छर घरों की छत एवं दीवार पर बैठते है और कीटनाशी छिड़काव किये गये सतह पर बैठने पर मर जाते है जिससे मलेरिया बीमारी पर नियंत्रण तो होता ही है, वहीं मच्छरों के प्रकोप से राहत होती है। यदि सभी स्थानों पर छिड़काव नहीं होता तो मच्छर वहीं बैठते हैं जहां उन्हें नुकसान नहीं पहुंचता। मच्छरों के बैठने की जगह की सभी सतहों पर छिड़काव होना चाहिये। दीवारों पर से फोटो, कैलेण्डर आदि हटाकर अन्य सामान जो हटाये जा सकते हैं, उन्हें हटाकर छिड़काव करवाना चाहिये । यदि घर के बाहर छिड़काव कराते हैं तो मच्छर घर के अंदर बैठते हैं और बीमारी फैलाते हैं । जिन कमरों में छिड़काव नहीं कराते हैं, उन कमरों में मच्छर बैठते हैं, इसलिये सभी कमरों में छिड़काव अवश्य करायें । छिड़काव कार्य के बाद 6-10 सप्ताह या ढाई माह तक घर में लिपाई-पुताई नहीं की जाना चाहिये, क्योंकि लिपाई-पुताई के कारण कीटनाशक दवाई का प्रभाव कम हो जाता है। उन्होंने अपील की है कि छिड़काव करने वाले व्यक्तियों को सभी कमरे में छिड़काव कराने में सहयोग करें।


