![]() |
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.जी.सी.चौरसिया ने बताया कि दस्तक अभियान के अंतर्गत विभिन्न गतिविधियां स्वास्थ्य संस्थाओं में आयोजित की जायेंगी। इसमें समुदाय में बीमार नवजातों और बच्चों की पहचान प्रबंधन एवं रेफरल, 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में शैशव एवं बाल्यकालीन निमोनिया की त्वरित पहचान एवं रेफरल, 5 वर्ष से कम उम्र के गंभीर कुपोषित बच्चों की सक्रिय पहचान, रेफरल एवं प्रबंधन, 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों में गंभीर एनीमिया की सक्रिय स्क्रीनिंग एवं प्रबंधन, 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में बाल्यकालीन दस्त रोग के नियंत्रण के लिये ओ.आर.एस. एवं जिंक के उपयोग संबंधी सामुदायिक जागरूकता को बढ़ावा एवं प्रत्येक घर में गृह भेंट के दौरान ओ.आर.एस. पहुंचाना, 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को विटामिन ए अनुपूरण, बच्चों में दिखाई देने वाली जन्मजात विकृतियों एवं वृध्दि विलंब की पहचान, समुचित शिशु एवं बाल आहार पूर्ति संबंधी समुदाय को समझाईश देना, एस.एन.सी.यू. एवं एन.आर.सी. से छुट्टी प्राप्त बच्चों में बीमारी की स्क्रीनिंग व फॉलोअप को प्रोत्साहन, आशा द्वारा प्रतिदिन नवजात शिशुओं की गृह भेंट, गृह भेंट के दौरान आंशिक रूप से टीकाकृत एवं छूटे हुये बच्चों की टीकाकरण स्थिति की जानकारी लेना आदि शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इस अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिये महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला, विकासखण्ड और सेक्टर स्तरीय अधिकारियों से सतत् समन्वय स्थापित कर माईक्रोप्लान के अनुरूप दस्तक अभियान की गतिविधियों को संचालित किया जायेगा। उन्होंने दस्तक अभियान के सफल संचालन के लिये मैदानी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिये हैं कि अभियान में शत-प्रतिशत बच्चों को निर्धारित स्वास्थ्य सेवायें प्रदान करें ।


