*🔶उपेक्षा का शिकार हो रही देवगढ़ किले की बावली*
*🔶बीते वर्षों में ₹500000 की लागत से किए गए कार्य साबित हुए दिखावे*
*👆👇🏻मनेश साहू संपादक मीडिया संगठन जिला अध्यक्ष 9407073701*
छिंदवाड़ा ----- यह तो सभी जानते है मध्य प्रदेश को 'कुबेर का खजाना' कहा जाता है, यहां ऐसी बहुत सी जगह है जिसे देख कर आप कही और का नजारा भूल ही जायेगे , क्योंकि प्रकृति ने यहां खूबसूरती बिखेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। यहां की नदियां, पहाडिय़ां, झरने और जंगल काफी खूबसूरती है इसलिए देश-दुनिया के पर्यटक और प्रकृतिक दीवाने यहां आते है।
*🔶देवगढ़ किला* ----- छिंदवाड़ा से करीब 50 किमी दूर मोहखेड़ के पास यह किला स्थित है। यह 18वीं शताब्दी का बना हुआ है। यह मध्यभारत के बड़े राजवंश का केन्द्र बिंदु था और गोंडवंश के राजाओं की राजधानी के रूप में प्रसिद्ध था। कहा जाता है कि इसका उत्पादन प्रतापी राजा जाटव के द्वारा हुआ। यह किला पहाड़ी पर बनाया गया है और गहरी खाई से लगा हुआ है। इस किले में आप उत्तर दिशा से प्रवेश कर सकते है। यह किला ऐतिहासिक महत्ता की कहानी को बखान करता है। इस किले में एक तालाब है जो मोतीटांका के नाम से जाना जाता है।
*🔶उपेक्षा का शिकार हो रहा दार्शनिक और पर्यटन स्थल देवगढ़ किला* ---- जहां अपने आप में अपार सौंदर्य और पर्यटन का भंडार संजोए देवगढ़ किला अपनी गाथा खुद गढ़ रहा है वहीं शासन-प्रशासन और पंचायत की अनदेखी और लापरवाही के चलते यह किला लगातार उपेक्षा का शिकार भी होता रहा है देवगढ़ किले की बावली वर्तमान में अपनी दुर्दशा खुद कह रही है जिसका जो योद्धा बीते वर्ष 2020 से 2021 के मध्य लगभग 500000 की लागत से मनरेगा मद से कराया गया था किंतु यदि देखा जाए तो यहां सिर्फ उक्त निर्माण कार्य का पत्थर ही स्पष्ट तौर पर नजर आएगा निर्माण कार्य तो जैसे कहीं गायब हो गया है ऐसे में यह कहना उचित ही होगा की यहां कार्य के नाम पर खानापूर्ति कर लाखों की राशि डकार ली गई है ऐसे में पर्यटन स्थल लगातार उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं और जहां इस देवगढ़ किले में प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं वह भी इस केले की हालत को देखकर निश्चित ही इसकी दुर्गति पर आंसू बहा कर जाते हैं।


