आयुर्वेद पद्धति से सरकार की इतनी बेरुखी समझ के परे: " डा. टाटा
स्वास्थ्य में यह पद्धति है बहुत काम की,
असाध्य रोगो में रामबाड़ है पद्धति
त्रेता एवं इस युग में पद्धति का देख चुके- हे लोग चमत्कार,सरकार का सहयोग मिले तो लाखो लोग हो सकते है स्वास्थ्,
*जुनारदेव-गुढी/अम्बाडा* आयुर्वेदाचार्य (गुरुजी): डा. प्रकाश टाटा ने पत्र- प्रतिनिधी से एक अनोपचारिक चर्चा के दौरान व्यक्त किये, आगे डा. टाटा ने कहा कि यदि बात स्वास्थ की करे तो यह पद्धति बहुत काम की है, एवं असाध्य रोगो में यह पद्धति तो रामबाड़ है, त्रेता युग हो या यह युग इस पद्धति के चमत्कार लोगो ने देख चुके है, हा यदि सरकार का सहयोग मिले तो आगे भी लोगो का जीवन सुखमय हो सकता है।
आगे डा. टाटा ने कहा कि मानव जीवन में शरीर का हिस्सा होने के चलते साध्य (छोटी बीमारी) एवं असाध्य रोग (गम्भीर बीमारी) लगी रहती है, जिसमें साध्य रोग का उपचार प्रदेश से ले केन्द्र सरकार के पास है किन्तु असाध्य रोग जैसे दम सांस, बावसीर, गैस, बी.पी., शुगर, लकवा, कमर गर्दन दर्द (डा. द्वारा बेल्ट पहनाया जाता है), कैंसर, किडनी, लीवर, बांझपन, मायग्रेन, मास्कूलर डिस्ट्रिपी, स्पाईन, लिया मेन्ट टिप्स-ए- बी.एन., आदि का सरकार एवं उनके भरोषे मंद पद्धति के पास कोई भी उपचार नहीं हैं, इस बात के चलते जिला सहित प्रदेश एवं देश के लाखो लोग अपनी इन बीमारियों को ले दुखी एवं परेशान है, वे मात्र इन बीमारियो से बचने एवं घुटकारा पाने समय एवं रुपया दोनों बर्बाद कर रहे हैंl
किन्तु निराशा ही हाथ लग रही है।
*असाध्य रोगों का उपचार ही नहीं*
डा. टाटा ने कहा कि असाध्य रोगो का उपचार न सरकार के पास है, और न ही उनके विश्वास पात्र पद्धति के पास है, रोगी ठीक होने की लालशा में समय एवं रुपया दोनो बर्बाद कर रहा है, किन्तु कोई स्थायी हल नहीं, जिसके चलते देश के लाखो लोग आज भी परेशान है।
*चार और रोग शरीर मे ला लेते हैं*
असाध्य रोग बड़े रोग होते हैं, ये रोग जिन्हें है, वे मुक्ति पाने उस लेबल की गोली खाते हैं, जिसमें शायद कन्ट्रोल होता है, परन्तु प्रतिदिन काम सुबह खायेंगे, शरीर में जायेगी, तो शरीर में गर्मीहट पैदा करेगी, पता चला एक बीमारी तो ठीक नहीं हो रही, इन दवा गोली खाने से चार अन्य रोग शरीर में आ गये।
*आयुर्वेद में उपचार है इन रोगो का*
डा. टाटा ने यह बात पूरे दावे के साथ कही है, कि उन रोगों का उपचार आयुर्वेद (जड़ी-बूटी) पद्धति में है, जिसका चमत्कार लोग भी देख चुके है, ये कोई कहानी नहीं है, प्रभु श्री राम एवं रावण, के बीच जब युद्ध हो रहा था, उस समय छोटे भाई लक्ष्मण को शक्ति लगी, उस समय भी आयुर्वेद एवं बैधराज काम आये थे, वही श्री लंका क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सनत जय सूर्या जब कमर-पैर के दर्द से दुखी थे, निजात पाने 50 करोण रु. खर्च किये, 07-08 देशो में उपचार कराया, किन्तु नतीजा शून्य, ये भी स्वस्थ हुऐ तो आयुर्वेद और एक बैधराज की सहायता से ही एक नया जीवन पाये।
*आयुर्वेद को जरा भी सहयोग नहीं करती सरकार*
आज जैसे प्रदेश से ले केन्द्र सरकार अपनी भरोसेमंद पद्धति पर प्रति वर्ष करोणो-अरबो रु. खर्च करती है, वही उसके एवज में आयुर्वेद को ले एक रुपया खर्च करना तो दूर जरा भी सहयोग नहीं करती है, जबकी आयुर्वेद ईश्वर के द्वारा दी गई एक अनमोल औषधि है, जिसमें असाध्य रोग को जड़ से समाप्त करने की क्षमता है- जो सरकार की बेरुखी झेल रही है।
*सहयोग का आग्रह किया डा. टाटा ने*
अन्त में डा. टाटा ने प्रदेश से ले केन्द्र सरकार से आग्रह किया है कि जैसे अपनी भरोसेमंद पद्धति को 100%, सहयोग करते हैं, वैसे ही आयुर्वेद को 25% सहयोग दे, छोटे-बडे हर स्तर पर प्रचार प्रसार करे जंगलो में औषधी वाले पेड़ पौधे लगाये, यदि ऐसा होता है तो बैधराज तो प्रशन्न होंगे, बटी देश के लाखों लोग स्वस्थ होंगे, और दुआये देंगे, क्योंकी वे इस पद्धति के सहारे अपने रोग से छुटकारा पायेंगे।

