छिन्दवाड़ा/ 29 दिसंबर 2023/ छिंदवाड़ा जिले के ग्राम सारसवाड़ा छिंदवाड़ा में स्थापित दो 220/132 के.वी.उपकेंद्र के 160 एम.व्ही.ए. पावर ट्रांसफार्मर में से एक ट्रांसफार्मर में अचानक अत्यंत ज्वलनशील गैस (एसीटिलिन) के बनने का पता चलते ही गत 12 दिसंबर 2023 को सावधानीपूर्वक एक पावर ट्रांसफार्मर को बंद किया गया । अचानक ट्रांसफार्मर मे एसीटिलिन गैस बनने की रिपोर्ट आने पर ट्रांसमिशन कंपनी के अधिकारियों द्वारा सावधानी बरतते हुए ट्रांसफार्मर को बंद करके ट्रांसफार्मर निर्माता कंपनी भेल के सर्विस इंजीनियर की तुरंत उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए सुधार कार्य प्रारम्भ किया गया तथा ट्रांसमिशन कंपनी के अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा एक ट्रांसफार्मर को बचाने और रबी सीजन में किसानों को बिजली देने के लिए रात दिन एक करके एक ट्रांसफार्मर की मरम्मत की गई तथा 28 दिसंबर 2023 बुधवार को ट्रांसफार्मर को पुनः चालू कर लोड ले लिया गया है। उल्लेखनीय है कि दोनों ट्रांसफार्मर से छिंदवाड़ा और पांढुर्णां जिलों को विद्युत प्रदाय की जाती है तथा इस दौरान दोनों जिलों में सिवनी-सारणी सर्किट से विद्युत प्रदाय करने का कार्य किया गया ।
म.प्र.पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अधीक्षण अभियंता ने बताया कि ट्रांसमिशन कंपनी के अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा एक ट्रांसफार्मर में तीव्र गति से सुधार कार्य के लिये 6000 लीटर पर ऑवर की उच्च क्षमता की आयल फ़िल्टर मशीन 400 के.व्ही. उपकेंद्र किरनापुर और ड्राई एयर जनरेटर प्लांट भोपाल के उपकेंद्र से एकत्र कर सिवनी, नरसिंगपुर, जबलपुर व पांढुर्णां जिलों से आयल टैंकर की तत्काल व्यवस्था की गई जिसकी मदद से सुधार कार्य जल्दी सम्भव हो सका । इस दौरान रबी सीजन होने के कारण अधिक बिजली की अवश्यकता होती हैं जिसके मैनेजमेंट के लिए परासिया, जुन्नारदेव, सौसर और पांढुर्णां में सारणी सर्किट से विद्युत प्रदाय किया गया जिससे विद्युत व्यवस्था सुचारु रूप से जारी रही। बाकी शेष चौरई, अमरवाड़ा व छिंदवाड़ा क्षेत्र को छिंदवाड़ा (सारसवाड़ा) में स्थापित एक 160 एम.व्ही.ए. पावर ट्रांसफार्मर से विद्युत प्रदाय किया गया जिसमें इन क्षेत्रों में ओवरलोडिंग की समस्या का निराकरण करते हुए बिजली प्रदान की गई । विशेष तौर पर छिंदवाड़ा के ग्रामीण क्षेत्र, बिछुआ, सांवरी, चौरई ग्रामीण, अमरवाड़ा ग्रामीण आदि क्षेत्रों में आवश्यकता के अनुसार लोड मैनेजमेंट कर विद्युत प्रदाय किया गया। ट्रांसमिशन कंपनी के अधिकारियों द्वारा बताया गया कि उनका लक्ष्य उपकेंद्र के एक 160 एम.व्ही.ए. के ट्रांसफार्मर को सुरक्षित रखते हुए बिजली प्रदाय सुनिश्चित करना और दूसरे ट्रांसफार्मर को कम से कम समय में सुधार कर छिंदवाड़ा की बिजली व्यवस्था बनाना था, क्योंकि उन्हें पता था कि यदि एक ट्रांसफार्मर खराब होता हैं तो उसको बदलने मे कम से कम 2 से 3 महीने का वक़्त लग सकता है और इस प्रकार की स्थिति निर्मित होने पर रबी सीजन में किसानों को सबसे ज्यादा समस्या होने की सम्भावना होती । इस सुधार कार्य के दौरान जिला प्रशासन से समय-समय पर कार्य की जानकारी लेकर आवश्यकता पड़ने पर प्रोत्साहित करते हुए उच्च कार्यालय से आवश्यकता के अनुसार समन्वय स्थापित कर कार्य को सम्पादित कराने मे विशेष मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।

