काली रेतीली मिट्टी पॉलीथिन के ऊपर डालकर पानी सिचा जा रहा है
तामिया - आर ई एस विभाग के अंतर्गत ग्राम पंचायत साजकुही में बना तालाब 2021मे निर्माण हुआ जो पानी के लिए आंसू बहा रहा है मौजूदा परिस्थितियों में आम नागरिक ग्रामीण पशु पक्षी जरूरत के लिए पानी की तलाश मैं परेशान होते देखे जा सकते है गुणवता का कुछ भी हो सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब क्षेत्र में जलस्तर नीचे जाने लग जाये सबसे बड़ा सवाल यह है कि पानी आएगा कहां से निश्चित ही तालाब निर्माण में पानी नहीं मिलाने की स्थिति में निर्माण कार्य प्रभावित होगा क्योंकि इसमें जो मिट्टी है। उसका पानी के बगैर मजबूती मिलना तकनीकी दृष्टि से कमजोर मानी जाती है।अभी जिस रेतीली काली मिट्टी को टैंकर से पानी बुलाकर सिचा जा रहा है जबकि दुम्मठ काली मिट्टी होनी थी परन्तु उस गीली रेतीली मिट्टी के गोल लौंन्दे बनाकर डालना चाहिए परंतु पॉलिथीन के भरोसे क्या वह 53लाख का तालाब का सिपेज रुकेगा या आर ई एस विभाग का नया प्रयोग कहे या फिर सांख बचाने के लिए बिल निकालने का तरीका निकाला गया है किसी हेमंत नाम के प्रशासकीय ठेकेदार ने निर्माण करवाया जा रहा है आर ई एस उपयत्री जो अपने भ्रष्ट कारनामों, के लिए जग जाहिर है। एवं तालाब निर्माण में पानी परिवहन के फर्जी बिल लगाने की वजह से काफी बदनाम है उसका मूल कारण है। कि भीषण ठड में तालाब निर्माण कार्य करा तो लिए जाएंगे लेकिन पडल मिट्टी कार्य में केवल कागजों में पानी डाला जायेगा आखिर पंचायत के उपयंत्री एवं आर ई एस के उपमंत्री इतना पानी कहां से लाएंगे यह बड़ा सवाल तालाब निर्माण कार्य में खड़ा हो गया अब देखना यह है। कि बगैर पानी के तालाबों की गुणवत्ता प्रभावित होने की दशा में जिम्मेदार कौन होगा कार्य की गुणवत्ता यदि पानी डालकर तालाब बनाएंगे तो गुण निश्चित ही सुद्ध होगी और तालाब निर्माण कार्य प्लास्टिक के भरोसे सफल को पाएंगे।
पडल भराई में काली मिट्टी के लोंदे बनाना उसके बाद पडल बनाने में कॉम्पेक्शन के समय एक तालाब निर्माण में लाखों लीटर पानी की, जरूरत होती है। जिसका बाकायदा भुगतान भी होता है लेकिन समस्या यह है। कि क्षेत्र में बनने वाले तालाबों में औसतन एक करोड़ लीटर पानी की आवश्यकता तालाबों में तकनीको दृष्टि से होती है।
लेकिन तामिया तहसील में ग्राम पंचायतों एवं आर ई एस विभाग के अंतर्गत इन दिनों छोटे बड़े, निस्तारी तालाब, निर्माण कार्य चल रहे हैं। जिन कि संख्या इस क्षेत्र में सौ से भी अधिक है और ठेकेदार अपनी सांख बचाने के लिए दोयम दर्जे की प्लास्टिक के भरोसे 53 लाख का तालाब मे सीपेज रोकना चाह रहा है मजदूरों से पूछने पर बताया कि पानी में मिट्टी डालने पर पॉलिथीन फट जा रही है जैसा आदेश होगा वही प्लास्टिक डालेंगे
ओ पी मौर्य
सब इंजीनियर आर ई एस से संपर्क करना चाहा जो मोबाइल बंद बता रहा

