छिन्दवाड़ा/ 05 दिसंबर 2023/ जिला न्यायालय परिसर छिन्दवाडा और तहसील मुख्यालयों के सिविल न्यायालयों अमरवाड़ा, चौरई, सौंसर व जुन्नारदेव में विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 135 एवं 126 के अंतर्गत बिजली चोरी, अनाधिकृत विद्युत का उपयोग एवं भार वृध्दि के लंबित प्रकरणों के निराकरण के लिये 9 दिसंबर को नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया है। इस नेशनल लोक अदालत में सभी घरेलू और कृषि, 5 किलोवाट भार तक के गैर घरेलू और 10 अश्व शक्ति भार तक के औद्योगिक श्रेणी के उपयोगकर्ता/उपभोक्ताओं के लिये छूट के प्रावधान किये गये हैं ।
म.प्र.पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमि. के कार्यपालन अभियंता ने बताया कि नेशनल लोक अदालत में विशेष न्यायालय में दर्ज प्रकरणों में आकलित सिविल दायित्व की राशि में 20 प्रतिशत और छ: माही चक्रवृध्दि दर के अनुसार 16 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से लगने वाले ब्याज की राशि पर शत-प्रतिशत तथा न्यायालय में प्रकरण दर्ज नहीं होने की स्थिति में आकलित सिविल दायित्व की राशि पर 30 प्रतिशत और छ: माही चक्रवृध्दि दर के अनुसार 16 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से लगने वाले ब्याज की राशि पर शत-प्रतिशत छूट प्रदान की जायेगी । शनिवार 9 दिसंबर को आयोजित नेशनल लोक अदालत में इस प्रकार दी जाने वाली छूट व आकलित सिविल दायित्व की राशि 50 हजार रूपये तक के प्रकरणों के लिये सीमित रहेगी । आवेदक को निर्धारित छूट के बाद शेष देय आकलित सिविल दायित्व की राशि का एकमुश्त भुगतान करना होगा । आवेदक को विधिक संयोजन नहीं होने की स्थिति में विधिक संयोजन प्राप्त करना और पूर्व में विच्छेदित संयोजनों के विरुध्द यदि कोई राशि हो तो उसका भुगतान किया जाना अनिवार्य होगा। आवेदक को विद्युत चोरी/अनाधिकृत उपयोग पहली बार किये जाने की स्थिति में ही छूट दी जायेगी। पूर्व की लोक अदालतों में छूट प्राप्त आवेदक छूट के पात्र नहीं रहेंगे । सामान्य विद्युत देयकों के विरूध्द बकाया राशि पर कोई छूट नहीं दी जायेगी । अब यह छूट मात्र नेशनल लोक अदालत 9 दिसंबर 2023 में समझौता करने के लिये लागू रहेगी तथा 9 दिसंबर के बाद कंपनी द्वारा छूट प्रदान नहीं की जायेगी और संबंधित उपभोक्ता/उपयोगकर्ता को 16 प्रतिशत चक्रवृध्दि ब्याज की दर से भुगतान करना होगा जिसकी जवाबदेही उपभोक्ता/उपयोगकर्ता की रहेगी। अपराध शमन फीस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार वसूल की जायेगी । उन्होंने उपभोक्ताओं/उपयोगकर्ताओं से अपील की है कि कंपनी और विशेष न्यायालय द्वारा की जाने वाली कार्यवाही से बचने के लिये इस लोक अदालत में प्रकरण का निराकरण कराये और सहयोग प्रदान करें । विस्तृत जानकारी के लिये संबंधित संभागीय कार्यालय या वितरण केंद्र से संपर्क किया जा सकता हैं।

