फेस स्कैन भी फेल! आवरिया पंचायत में ‘एक चेहरा-अनेक नाम’ का मस्टर रोल खेल उजागर
मस्टर रोल में फर्जी हाजिरी का खेल उजागर — आवरिया पंचायत की मॉनिटरिंग पर खड़े हुए गंभीर सवाल
जुन्नारदेव (छिंदवाड़ा), मार्च 2026।
सरकार ने मनरेगा में पारदर्शिता लाने के लिए 2 मार्च 2026 से फेस स्कैन और NMMS ऐप को अनिवार्य किया था, लेकिन जुन्नारदेव जनपद की ग्राम पंचायत आवरिया में यह तकनीक भी कथित फर्जीवाड़े के आगे बेअसर नजर आ रही है। यहां मस्टर रोल में एक ही महिला की फोटो अलग-अलग नामों पर अपलोड होने का मामला सामने आया है, जिसने पंचायत से लेकर जनपद स्तर की मॉनिटरिंग व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों और दस्तावेजों से मिली जानकारी के अनुसार, मनरेगा के तहत चल रहे निर्माण कार्यों की मस्टर रोल एंट्री में गंभीर अनियमितताएं दिखाई दे रही हैं। सबसे पहले यह मामला 3 मार्च 2026 की मस्टर रोल संख्या 57600 से उजागर हुआ। काम के स्थल से अपलोड की गई ग्रुप फोटो में स्पष्ट दिखता है कि दो अलग-अलग जॉब कार्ड धारकों के नाम पर एक ही महिला की फोटो इस्तेमाल की गई है।
मस्टर रोल के रिकॉर्ड के मुताबिक:
जॉब कार्ड नंबर MP-36-005-085-001/288-A पर ‘मीता’ (MEETA) की फोटो दर्ज है।
वहीं जॉब कार्ड नंबर MP-36-005-085-001/288-B पर ‘दिलीप वरकड़े’ (पुरुष) का नाम दर्ज है, लेकिन फोटो में फिर वही महिला दिखाई दे रही है।
यही नहीं, 7 मार्च 2026 को कार्य कोड 1736005085/WC/22012035327038 (परकोलेशन टैंक निर्माण कार्य, श्रीझोत ढाना स्कूल के नीचे, ग्राम पोही) के तहत मस्टर रोल नंबर 57595 में भी इसी तरह की गड़बड़ी सामने आई। उपस्थिति सूची में SANTI PARTETI (सीरियल नंबर 7) और पार्वती (सीरियल नंबर 8) के नाम पर अलग-अलग हाजिरी दर्ज है, लेकिन अपलोड की गई ग्रुप फोटो में दोनों के स्थान पर एक ही महिला का चेहरा दिखाई देता है।
इसी कार्य से जुड़े एक अन्य मस्टर रोल नंबर 57594 में भी अनियमितता सामने आई है, जहां दिपली (जॉब कार्ड: MP-36-005-085-001/72-A) और सविता (जॉब कार्ड: MP-36-005-085-002/107) दोनों को उपस्थित दिखाया गया है, जबकि फोटो में दोनों की जगह एक ही महिला दिखाई देती है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सब मेट द्वारा उपस्थिति दर्ज करते समय किया गया और इसकी समय पर मॉनिटरिंग नहीं हो सकी। नियमों के अनुसार मस्टर रोल की ऑनलाइन निगरानी और फील्ड वेरिफिकेशन की जिम्मेदारी पंचायत सचिव, रोजगार सहायक और जनपद स्तर के अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी (APO) की होती है।
सूत्रों के अनुसार ग्रामीणों ने पहले भी फर्जी हाजिरी की शिकायतें की थीं, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। वहीं कुछ ग्रामीण यह भी दावा करते हैं कि जनपद स्तर पर अधिकारियों की नियमित मॉनिटरिंग नहीं होने के कारण ऐसी स्थिति बनती है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
इस मामले के सामने आने के बाद चर्चा है कि संबंधित मस्टर रोल को तकनीकी कारण बताकर ‘शून्य’ (Zero) करने की तैयारी की जा रही है, ताकि भुगतान रोककर मामला शांत किया जा सके। ग्रामीणों का आरोप है कि पहले भी अनियमितता सामने आने पर इसी तरीके से मामलों को दबाने की कोशिश की गई है।
इस पूरे मामले पर जब जनपद पंचायत जुन्नारदेव की मनरेगा शाखा के अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उनका फोन नहीं उठ सका, इसलिए उनका पक्ष खबर में शामिल नहीं किया जा सका।
वहीं सहायक यंत्री अमित दुबे का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में आया है और इसकी विस्तृत जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि जांच में कोई भी व्यक्ति दोषी पाया गया तो संबंधित मेट और पंचायत कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच होगी या फिर मस्टर रोल शून्य कर फाइल बंद कर दी जाएगी?
मनेश पत्रकार आपसे पूछता है…
क्या मनरेगा में पारदर्शिता लाने के लिए लाई गई फेस स्कैन तकनीक भी जमीन पर फेल हो रही है, या फिर सिस्टम की निगरानी में ही कहीं बड़ी चूक है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए।
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