घोड़ावाड़ी =और करमोहोनी बँधी टेकड़ी के कई जगह नवमी और कस्बो में तारीख पर इमाम हुसैन की याद में उठाया आलम फातिहा पढ़ा गया फतिहा होने के बाद शीरनी वाला लंगर पाते गऐ इस अवसर पर जगह-जगह मातमी सदाओ के बीच हजरत हुसैन की याद में निशान के साथ जुलूस निकाला गया करमोहोनी बँधी सोनी मोहोला विजिय नगर टेकरी मस्जिद होते हुये मुस्लिम धर्मावलबियो मैं निशान के साथ अपने ही ओला मोहल्ले में जुलूस निकली इसमें उन्होंने या हुसैन या अली के नारे लगाए दूसरी और कहीं-कहीं मोहर्रम की आठवीं सोमवार की देर शाम को लेकर रात तक चौकी और निशान के साथ जुलूस निकाली हिंदुस्तान से कहा कि कर्बला की सर जमी पर हक बाबा तिल की जंग में इमामे हुसैन को 8 मोहरम को यहां याजीदियो ने अपनी बंद कर दिया था जबकि इमाम ई हुसैन के साथ छोटे-छोटे बच्चे और बुजुर्ग भी थे जहां दूसरे धर्म में नया साल खुशियों के साथ मनाने की परंपरा है वही इस्लामी नया साल की शुरुआत गम से होती है इस्लामी साल हिजरी का पहला महीना मोहर्रम होता है और मोहर्रम के महीने की 10 तारीख को इस्लाम के आखिरी पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए ताजिऐ निकल जाते हैं

