मोहगांव थाना स्टाफ की कमी से कई वर्षों से जूझ रहा
मध्यप्रदेश के पांढुरना जिले की सौसर तहसील का नगर थाना मोहगांव हैं जो कि नगर का मुख्य केन्द्र माना जाता है जिसमें अपराधियों पर शिकंजा कसा जाता है व किसी को परेशान या अन्य अपराध वाली समस्या पर न्याय देने का कार्य ही थाने में किया जाता है। मोहगांव नगर की शांति व अपराधों से सुरक्षा के लिये शासन द्वारा स्थापित थाना मोहगांव में 10 स्टाफ से शासन कम बल से ही काम चल रहा है जिसमें 1 थाना प्रभारी, 2 हवलदार 3 ए एएसआई 4 आरक्षक के भरोसे थाना चल रहा है मगर करीब पांच से दस बर्ष समय से मोहगांव थाना मात्र 10 लोगों के स्टाफ मात्र से चलाया जा रहा है थाने में इतने समय से पूरा स्टाफ आज तक पूरा नहीं हो पाया है जबकि
जबकि इस थाने में मोहगांव नगर के साथ ग्रामीण अंचल के 34 से अधिक छोटे-मोटे ग्राम आते हैं ऐसे में स्टाफ की कमी होने के कारण कई छोटे-मोटे गांव में महीना तक पुलिस नहीं पहुंच पाती है तो इतना ही नहीं कई ऐसे प्रकरण जिन लोगों पर चलते उन तक समंस तालीम नहीं हो पाते हैं तो वही थाने में कई ग्रामीण एफआईआर करने पहुंचते हैं तो घंटों इंतजार करना पड़ता अब ऐसे में देखना है कि थाने में कब तक स्टॉप की पूरी भरपाई होती या यूं ही कम स्टाफ से थाने को चलाया जाएगा इसी आश में इंतजार किया जा रहा है।
*इस थाने के अंतर्गत इतने ग्रामीण अंचल गांव* :__ पांढुर्णा जिले के मोहगांव नगर थाना में खैरीपंथा, कोपरावाडी कला , सिंगपुर, मुगनापार, देवली, चिकली , भुम्मा ,गोगरी खापा, छतरापुर ,पंडरी , पंधराखेड़ी अंबाखापा, पीपल गांव सावंगी , सावाजपानी, कुंदारवादी, रजाड़ी पीपला , कन्नरगांव ,पचालखापा, नवेगांव , जामलापानी, नंदेवानी, का, सिलवानी दुद्देवानी ,सरकी खापा, डुक्करजेला मराम ,जोबंन डेरा, बोर पानी, बोदलपत्थर थाने के अंतर्गत छोटे-मोटे गांव आते हैं इन ग्रामीण अंचलों में महीना तक थाने का कोई कर्मचारी चक्कर लगाने तक नहीं पहुंच पाते हैं ऐसे में स्टाफ की भारी कमी देखने को मिल सकती है
*थाने में स्टाफ कमी से अवैध गतियां पर समय पर लगाम न लगना*। सूत्रों की माने तो यह भी देखने में आता है की अधिकतर ग्रामीण अंचलों में अवैध गतियां ज्यादा चलते रहती है यहां तक पुलिस प्रशासन के हाथ पहुंचने में काफी समय लग जाता है ऐसे में यह देखने को मिलता है, कि स्टॉप की कमी होने के कारण कई अवैध गति एक गंभीर और बड़े हादसे का रूप ले लेती हैं ऐसे में थाने का स्टॉप सही रूप से हो तो ग्रामीण अंचलों में इन पर लगाम लग सकता हैं
*नगर में रात के समय गस्त ग्रामीण अंचलों के कुछ गावों में नहीं हो पाती है*
देखा जाए तो ग्रामीण अंचल में कुछ गावों में रात के समय महीना तक गस्त होते नहीं दिखा दे देती है तो सूत्र ये भी बताते कुछ गावों में पुलिस पहुंची हि नही कोई दुघर्टना घटित होने पर ही पोलिस पहुच पाती हैं
*कई कर्मचारियों को 12 घंटे की अधिक समय ड्यूटी करनी पड़ती है* यदि थाने में स्टाफ कमी होती है तो ऐसे में यह भी समस्या आती है कि कई कर्मचारियों को एक से डबल काम नौकरी करनी पड़ती है ऐसे में इन्हें कई महीनो तक छुट्टियां भी नहीं मिल पाती है तो वही अगस्त थाना पहरी कोर्ट का कार्य डाक वितरण कष्ट फील्ड अन्य कई कार्यवाही भी संभालने पड़ते हैं अब ऐसे में यदि एक ही कर्मचारियों को एक से अधिक कम स्टॉप के चलते करना पड़े तो कई कार्य समय पर नहीं हो पाते ऐसे में कई बार ग्रामीणों को अपनी रिपोर्ट दर्ज कर आते समय भी घंटों इंतजार करना पड़ता है तो वही कई लोगों को आज तक समय पर तालीम नहीं पहुंच पाते हैं अब देखना है कि इस थाने में कब तक स्टॉप की पूर्ति होती है

