मौत का सौदा बनता कोयला, सिस्टम की चुप्पी पर सवाल
छिंदवाड़ा / परासिया | फरवरी 2026
“जब कोयला मौत का सौदा बन जाए, तब खामोशी भी अपराध बन जाती है।”
परासिया विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत परासिया, गढ़ी अंबाडा, बड़कुही और रावनवाडा क्षेत्रों में बंद पड़ी ओपन कास्ट खदानों में अवैध कोयला खनन एक बार फिर तेज़ी से फल-फूल रहा है। यह वही इलाका है, जहां पूर्व में अवैध खनन के कारण कई मजदूरों की जान जा चुकी है और यह मुद्दा लगातार अख़बारों की सुर्ख़ियों में रहा है।
इसके बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) द्वारा पूर्व में की गई कार्रवाई महज़ दिखावा साबित हुई। जिन अवैध खदानों की पुराई की गई थी, वहां फिर से खुदाई शुरू हो चुकी है और कोयला माफिया प्रशासन व शासन की नाक के नीचे बेखौफ होकर कोयले की चोरी कर रहा है।
परासिया जनपद पंचायत अंतर्गत रावनवाडा बस्ती के पीछे स्थित बंद ओपन कास्ट खदान एवं सिद्ध बाबा के पास बंद घोषित ओपन कास्ट खदान में दिनदहाड़े अवैध खनन जारी है। ग्रामीणों का कहना है कि ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और ट्रकों से कोयले की ढुलाई खुलेआम हो रही है। सवाल यह नहीं है कि अवैध खनन हो रहा है या नहीं, सवाल यह है कि इतनी स्पष्ट गतिविधियों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो पा रही?
मजदूरी के बदले जान का जोखिम
अवैध खनन में लगे अधिकतर मजदूर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से हैं। न सुरक्षा उपकरण, न हेलमेट, न कोई चिकित्सकीय सुविधा। जरा-सी चूक पूरे ढांचे को ध्वस्त कर सकती है, लेकिन पेट की मजबूरी उन्हें हर दिन मौत के मुहाने तक ले जाती है।
“कार्रवाई सिर्फ काग़ज़ों में”
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि जब मामला तूल पकड़ता है, तब कुछ दिनों के लिए प्रशासन हरकत में आता है, लेकिन जैसे ही ध्यान हटता है, अवैध खनन फिर शुरू हो जाता है। निरीक्षण और चेतावनियों के बाद भी स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।
पर्यावरण पर सीधा हमला
खनन विशेषज्ञों के अनुसार, बंद खदानों में इस तरह की खुदाई से भू-धंसाव, जलस्तर असंतुलन और गंभीर पर्यावरणीय खतरे पैदा हो सकते हैं। खेतों और बस्तियों के पास हो रहा यह खनन भविष्य में किसी बड़े हादसे की नींव रख रहा है।
प्रशासनिक चुप्पी
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद स्पष्ट जवाब नहीं मिलते। जिम्मेदार विभागों की ओर से अब तक कोई ठोस सार्वजनिक बयान या रिपोर्ट सामने नहीं आई है, जिससे अविश्वास की स्थिति बनती जा रही है।
जनता की मांग
क्षेत्रवासियों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, अवैध खनन में शामिल लोगों पर सख्त कार्रवाई हो और मजदूरों की सुरक्षा व पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जाए।
रावनवाडा की यह कहानी सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की परीक्षा है—जहां यह तय होना बाकी है कि इंसानी जान ज्यादा कीमती है या अवैध कोयला।
पत्रकार की जनता से अपील:
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