कैमरे हैं… पर नजर नहीं! चंदामेटा सिविल अस्पताल में CCTV सालों से बंद, सुरक्षा भगवान भरोसे
| छिंदवाड़ा
परासिया क्षेत्र के चंदामेटा सिविल अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सवालों के घेरे में है। अस्पताल परिसर में एंट्री गेट से लेकर अंदरूनी हिस्सों तक लगाए गए CCTV कैमरे वर्षों से बंद पड़े हैं, जिससे मरीजों और स्टाफ की सुरक्षा भगवान भरोसे बनी हुई है।
स्थानीय लोगों और अस्पताल कर्मियों के अनुसार यह स्थिति कोई नई नहीं, बल्कि कई वर्षों से चली आ रही है। कैमरे दीवारों पर लगे जरूर हैं, लेकिन न उनमें बिजली है, न रिकॉर्डिंग, और न ही किसी तरह की मॉनिटरिंग। कैमरों पर जमी धूल, खुले व लटकते वायर और खराब उपकरण साफ तौर पर प्रशासनिक लापरवाही की कहानी बयान करते हैं।
फरवरी 2026 में मौके पर लिए गए फोटो इस बात की पुष्टि करते हैं कि CCTV सिस्टम पूरी तरह निष्क्रिय है। कहीं कैमरे झुके हुए हैं, कहीं कनेक्शन कटे हैं, तो कहीं लंबे समय से किसी ने देखने तक की जहमत नहीं उठाई।
सिविल अस्पताल कोई साधारण जगह नहीं है। यहां रोजाना सैकड़ों मरीज, महिलाएं, गर्भवती माताएं, बुजुर्ग और बच्चे इलाज के लिए आते हैं। विवाद, चोरी या अन्य अप्रिय घटनाओं की आशंका को देखते हुए CCTV का बंद होना सीधे तौर पर मरीजों की सुरक्षा से खिलवाड़ है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी घटना की स्थिति में रिकॉर्डिंग न होने से न जांच हो पाएगी और न ही दोषियों की पहचान संभव होगी।
इस गंभीर मुद्दे पर जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक किसी का पक्ष सामने नहीं आ सका। इससे यह सवाल और गहरा हो जाता है कि अधिकारी इस स्थिति से अनजान हैं या जानबूझकर नजरअंदाज कर रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा CCTV सिस्टम पर सरकारी धन खर्च किया गया होगा। ऐसे में कैमरों का बंद रहना केवल तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन की बर्बादी का मामला भी बनता है। सवाल यह है कि—
आखिरी बार CCTV सिस्टम की जांच कब हुई?
इसके रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी है?
जानकारी होने के बावजूद अब तक सुधार क्यों नहीं किया गया?
यह रिपोर्ट किसी पर आरोप लगाने के लिए नहीं, बल्कि सार्वजनिक हित में प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के उद्देश्य से है। उम्मीद की जानी चाहिए कि संबंधित विभाग जल्द संज्ञान लेकर CCTV सिस्टम को दुरुस्त करेगा और अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाएगा।
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