राजनीति नहीं, राष्ट्र सेवा का मंत्र—दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर जुन्नारदेव में दिखी वैचारिक एकजुटता”

chif editor MANESH SAHU 9407073701
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राजनीति नहीं, राष्ट्र सेवा का मंत्र—दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर जुन्नारदेव में दिखी वैचारिक एकजुटता”
राजनीति नहीं, राष्ट्र सेवा का मंत्र—दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि पर जुन्नारदेव में दिखी वैचारिक एकजुटता”
जुन्नारदेव में बुधवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जहाँ श्रद्धा, विचार और संगठन एक ही सूत्र में बंधे नजर आए। अवसर था भारतीय जनसंघ के प्रणेता और एकात्म मानववाद के प्रखर विचारक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि का। नगर की राजनीति से ऊपर उठकर यह आयोजन उनके विचारों को याद करने और आत्मसात करने का प्रयास बन गया।
मामला: बुधवार, 11 फरवरी 2026
स्थान: दीनदयाल उद्यान, जुन्नारदेव (छिंदवाड़ा)
भारतीय जनता पार्टी नगर मंडल जुन्नारदेव के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में स्थानीय दीनदयाल उद्यान स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम की शुरुआत सादगी के साथ हुई, लेकिन माहौल में गंभीरता और वैचारिक प्रतिबद्धता साफ झलक रही थी।
मंडल प्रभारी मनीष श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में दीनदयाल उपाध्याय के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने राजनीति को सत्ता का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा और समर्पण का साधन माना। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि दीनदयाल जी के विचारों से प्रेरणा लेकर समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुँचाने का संकल्प लें।
वहीं मंडल अध्यक्ष विवेक चंद्रवंशी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद के सिद्धांतों को सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने बताया कि कैसे यह विचारधारा व्यक्ति, समाज और राष्ट्र—तीनों के संतुलित विकास की बात करती है। साथ ही उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि इन योजनाओं की जड़ में दीनदयाल जी की सोच स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष रमेश सालोडे, नगर पालिका उपाध्यक्ष सोनिया कुमरे, वरिष्ठ नेता राजेश श्रीवास्तव और शंकर सेन सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। महिला मोर्चा अध्यक्ष भुवनेश्वरी भन्नारे, मंडल पदाधिकारी, जनपद सदस्य, पार्षद, सभापति, सरपंच, युवा कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में मातृशक्ति की उपस्थिति ने आयोजन को व्यापक जनसमर्थन दिया।
पूरे कार्यक्रम के दौरान कहीं भी राजनीतिक कटाक्ष या उग्र भाषण नहीं दिखे। फोकस केवल एक बात पर रहा—विचार, सेवा और समाज। यह आयोजन इस बात का संकेत था कि पुण्यतिथि केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि आत्ममंथन और दिशा तय करने का अवसर भी हो सकती है।
दीनदयाल उपाध्याय जैसे विचारकों की प्रासंगिकता आज के समय में और भी बढ़ जाती है, जब विकास के साथ मानवीय मूल्यों को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन चुका है। जुन्नारदेव का यह आयोजन उसी संतुलन की याद दिलाता है।
मनेश पत्रकार आपसे पूछता है…
आज के दौर में क्या राजनीतिक दल और कार्यकर्ता वास्तव में दीनदयाल उपाध्याय के विचारों को व्यवहार में उतार पा रहे हैं, या वे सिर्फ आयोजनों तक सीमित रह गए हैं? आपकी राय क्या है? कमेंट में जरूर बताइए।

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