अंधेरे से उजाले तक: पत्रकारों की आवाज़ ने रोशन किया महादेव उड़ान पुल

अंधेरे से उजाले तक: पत्रकारों की आवाज़ ने रोशन किया महादेव उड़ान पुल
अंधेरे से उजाले तक: पत्रकारों की आवाज़ ने रोशन किया महादेव उड़ान पुल
जुन्नारदेव | फरवरी 2026
जब सवाल आम लोगों की सुरक्षा का हो और जिम्मेदार महकमे खामोश हों, तब अगर कोई आवाज़ गूंजती है तो वह होती है पत्रकारिता की। जुन्नारदेव का महादेव उड़ान पुल इसका ताजा उदाहरण है—जो महीनों तक अंधेरे में डूबा रहा, लेकिन अब पत्रकारों की सतत पहल के बाद दूधिया रोशनी में नहा रहा है।
महादेव उड़ान पुल शहर का प्रमुख आवागमन मार्ग है। बीते कई महीनों से यहां लगी स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी थीं। रात ढलते ही पुल पर घना अंधेरा छा जाता था। वाहन चालकों को अंदाज़े से गाड़ी चलानी पड़ती थी, वहीं पैदल राहगीरों—खासतौर पर महिलाओं और बुज़ुर्गों—में भय बना रहता था। स्थानीय नागरिकों का कहना था कि अंधेरे का फायदा उठाकर असामाजिक तत्वों की गतिविधियां भी बढ़ने लगी थीं।
जब सिस्टम सोया रहा, पत्रकार जागते रहे
इस गंभीर और लगातार बनी समस्या को स्थानीय पत्रकारों ने नज़रअंदाज़ नहीं किया। जनवरी 2026 के अंतिम सप्ताह से ही महादेव उड़ान पुल की बदहाली को लेकर समाचार पत्रों, डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर तथ्यात्मक रिपोर्टिंग की गई। तस्वीरों और ग्राउंड रिपोर्ट के ज़रिए यह साफ दिखाया गया कि समस्या केवल लाइट बंद होने की नहीं, बल्कि सीधे-सीधे जनसुरक्षा से जुड़ी है।
लगातार खबरों के प्रकाशन के बाद नगर प्रशासन और संबंधित विद्युत व नगर पालिका विभाग हरकत में आया। अधिकारियों द्वारा स्थिति का निरीक्षण कराया गया और तकनीकी टीम को मौके पर भेजा गया।
त्वरित कार्रवाई, जमीन पर दिखा असर
फरवरी 2026 के पहले सप्ताह में तकनीकी टीम ने उड़ान पुल की सभी खराब स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत की। कुछ स्थानों पर नए लाइट पॉइंट भी दुरुस्त किए गए। वर्तमान स्थिति यह है कि महादेव उड़ान पुल पूरी तरह रोशन है। रात के समय अब आवागमन सुचारु है और लोगों में सुरक्षा का भरोसा लौटा है।
स्थानीय पत्रकार समूह का कहना है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में पत्रकारों की जिम्मेदारी केवल खबर छापना नहीं, बल्कि जनहित से जुड़ी समस्याओं को जिम्मेदारों तक पहुंचाना भी है। उनका मानना है कि यह सफलता सामूहिक पत्रकारिता की है, न कि किसी एक व्यक्ति की।
जनता बोली—ऐसी पत्रकारिता की ज़रूरत है
उड़ान पुल के रोशन होने के बाद क्षेत्रवासियों ने राहत की सांस ली है। राहगीरों और वाहन चालकों ने पत्रकारों की भूमिका की खुलकर सराहना की। लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह स्थानीय मुद्दों पर सजग पत्रकारिता होती रहे, तो शहर की कई जमीनी समस्याओं का समाधान संभव है।
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि जब पत्रकार ईमानदारी से जनता की आवाज़ बनते हैं, तो व्यवस्था को भी सुनना पड़ता है।
मनेश पत्रकार आपसे पूछता है…
क्या आपके इलाके में भी कोई ऐसी जनसमस्या है, जिस पर आवाज़ उठाने की ज़रूरत है?
कमेंट में बताइए—आप चाहते हैं अगला सवाल किस मुद्दे पर उठे?

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