देश को भविष्य के बड़े जलसंकट, सूखे और अकाल से बचाने के लिए छिंदवाड़ा के शिव कुमार बंदेवार ने एक अभूतपूर्व विजन तैयार किया है। आठ वर्ष की कड़ी मेहनत और गहन रिसर्च के बाद तैयार किए गए इस जनकल्याणकारी प्रोजेक्ट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष रखने के लिए बंदेवार अक्टूबर 2024 में साइकिल से दिल्ली (प्रधानमंत्री कार्यालय) तक पहुंचे थे। हालांकि, वहां 12 घंटे इंतजार करने के बाद भी सुरक्षा कारणों से उनकी प्रधानमंत्री जी से सीधी मुलाकात नहीं हो पाई। अब उन्होंने राज्य सरकार के मंत्रियों, राजनीतिक प्रतिनिधियों और मुख्यमंत्री के माध्यम से अपने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को प्रधानमंत्री और नीति निर्माताओं तक पहुंचाने की इच्छा व्यक्त की है।
शिव कुमार बंदेवार के अनुसार, केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना' देश की तात्कालिक मांग है, लेकिन इसके लिए भारी-भरकम बजट की आवश्यकता है। बंदेवार ने दावा किया है कि यदि सरकार उनके द्वारा सुझाई गई 'प्रधानमंत्री दुकान योजना' को अमल में लाती है, तो केंद्र सरकार को बिना किसी अतिरिक्त कर्ज के लगभग 50 लाख करोड़ रुपये का विकास शुल्क प्राप्त हो सकता है। इस विशाल राशि का उपयोग कर सरकार समय से पहले राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना को पूरी तरह धरातल पर उतार सकती है।
बंदेवार ने चेताया कि यदि हमने 'राष्ट्रीय नदी जोड़ो योजना' को एक निश्चित समयावधि में पूरा नहीं किया, तो भविष्य में देश को भयंकर जलसंकट, पेयजल किल्लत, सिंचाई संकट और सूखे जैसी विभीषिका का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने इस पूरी योजना को 25 दिसंबर 2032 तक शत-प्रतिशत पूर्ण करने का पूरा रोडमैप और समाधान तैयार किया है।
आठ साल की रिसर्च से तैयार यह प्रोजेक्ट देश की तस्वीर बदल सकता है। मैं माननीय मुख्यमंत्री जी और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के माध्यम से अपना यह सुझाव प्रधानमंत्री जी और नीति आयोग के नीति निर्माताओं तक पहुंचाना चाहता हूँ, ताकि बिना किसी कर्ज के देश की नदियों को जोड़ा जा सके और आने वाली पीढ़ियों को जलसंकट से मुक्त किया जा सके।
शिव कुमार बंदेवार, शोधकर्ता एवं विजनरी (छिंदवाड़ा)
साइकिल से दिल्ली तक का सफर तय कर देशहित में आवाज उठाने वाले शिव कुमार बंदेवार के इस विजन की स्थानीय स्तर पर भी काफी चर्चा है। जानकारों का मानना है कि यदि इस योजना का सही तरीके से परीक्षण कर इसे लागू किया जाए, तो यह देश के बुनियादी ढांचे और जल प्रबंधन के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है। अब देखना यह है कि राज्य सरकार के माध्यम से बंदेवार का यह 50 लाख करोड़ का विजन प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक कितनी जल्दी पहुंचता है।
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