सच की आँखे छिंदवाड़ा। जिला पुलिस कप्तान के निर्देशन में आज दिनांक 17 जुलाई 2026 को थाना देहात क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सांदीपनी विद्यालय और शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गुरैया हाई स्कूल में एक वृहद नशा मुक्ति जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। 'नशे से दूरी है जरूरी 2.0' अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में करीब 1200 विद्यार्थियों, प्राचार्यों और शिक्षक-शिक्षिकाओं ने सहभागिता की।
जीवन भर नशे से दूर रहने का संकल्प
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित विशाल छात्र समूह को नशे से दूर रहने और समाज व राष्ट्र को नशा मुक्त बनाने की महत्वपूर्ण शपथ दिलाई गई। विद्यार्थियों को संकल्प दिलाया गया कि वे स्वयं तो जीवन में कभी किसी भी प्रकार का नशा नहीं करेंगे, साथ ही अपने परिवार के किसी भी सदस्य या आसपास के लोगों को भी नशे की लत से दूर रहने के लिए प्रेरित करेंगे। [1]
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित विशाल छात्र समूह को नशे से दूर रहने और समाज व राष्ट्र को नशा मुक्त बनाने की महत्वपूर्ण शपथ दिलाई गई। विद्यार्थियों को संकल्प दिलाया गया कि वे स्वयं तो जीवन में कभी किसी भी प्रकार का नशा नहीं करेंगे, साथ ही अपने परिवार के किसी भी सदस्य या आसपास के लोगों को भी नशे की लत से दूर रहने के लिए प्रेरित करेंगे। [1]
थाना प्रभारी ने समझाए नशे के दुष्परिणाम
कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित देहात थाना प्रभारी निरीक्षक गोविंद सिंह राजपूत ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए नशे के सामाजिक, आर्थिक और शारीरिक दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि छात्र जीवन देश के निर्माण की नींव है, इसलिए युवाओं का जागरूक होना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही सहायक उपनिरीक्षक (स.उ.नि.) नितेश ठाकुर ने भी बच्चों को कानून और सुरक्षा संबंधी आवश्यक समझाइश दी।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित देहात थाना प्रभारी निरीक्षक गोविंद सिंह राजपूत ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए नशे के सामाजिक, आर्थिक और शारीरिक दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि छात्र जीवन देश के निर्माण की नींव है, इसलिए युवाओं का जागरूक होना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही सहायक उपनिरीक्षक (स.उ.नि.) नितेश ठाकुर ने भी बच्चों को कानून और सुरक्षा संबंधी आवश्यक समझाइश दी।
विद्यालय प्रबंधन ने पुलिस प्रशासन के इस सकारात्मक कदम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे अभियानों से स्कूली बच्चों में सही उम्र में सही संस्कार और जागरूकता का संचार होता है।
