कुएं में ज़हरीली दवा! साजिश या लापरवाही? 4 दिनों से बूंद-बूंद पानी को तरस रहा पूरा गांव

chif editor MANESH SAHU 9407073701
By -
0
कुएं में ज़हरीली दवा! साजिश या लापरवाही? 4 दिनों से बूंद-बूंद पानी को तरस रहा पूरा गांव
कुएं में ज़हरीली दवा! साजिश या लापरवाही? 4 दिनों से बूंद-बूंद पानी को तरस रहा पूरा गांव

अमरवाड़ा (छिंदवाड़ा) | मामला: ग्राम पंचायत रजोला के ग्राम  (राजनगांव) का

अमरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत रजोला अंतर्गत ग्राम  (राजनगांव) से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। जिस शासकीय कुएं से नल-जल योजना के तहत पूरे गांव को पेयजल की आपूर्ति की जाती है, उसमें खेतों में उपयोग होने वाली खरपतवार नाशक दवा का पैकेट मिलने के बाद गांव में हड़कंप मच गया। घटना के बाद से पिछले चार दिनों से गांव में पेयजल आपूर्ति बंद है और ग्रामीण पीने के पानी के लिए परेशान हैं।ग्रामीणों के अनुसार, नलचालक को कुएं के पानी से संदिग्ध गंध आने पर संदेह हुआ। जांच करने पर कुएं में एक पैकेट तैरता दिखाई दिया, जिस पर "ATRAZINE (एट्राजिन)" और "आसीराज" लिखा हुआ था। इसकी सूचना तत्काल ग्राम सरपंच को दी गई। सरपंच और ग्रामीण मौके पर पहुंचे तथा एहतियात के तौर पर पानी की सप्लाई तुरंत बंद कर दी गई।
ग्रामीणों ने बताया कि घटना का वीडियो भी बनाया गया है और सरपंच व ग्रामीणों की मौजूदगी में पंचनामा तैयार किया गया। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, कुएं की साफ-सफाई और पानी की जांच के बाद ही दोबारा पेयजल आपूर्ति शुरू की जाएगी। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि दवा कुएं में किसने और किन परिस्थितियों में डाली। इस संबंध में जांच की मांग की जा रही है।इस घटना ने ग्रामीणों की पुरानी पीड़ा भी ताजा कर दी है। उनका कहना है कि पहले भी दूषित पेयजल के कारण गांव में उल्टी-दस्त जैसी गंभीर बीमारी फैली थी, जिसमें कुछ लोगों की मौत होने की बात ग्रामीण बताते हैं। इसी कारण इस बार लोगों ने कोई जोखिम न लेते हुए तुरंत पानी की सप्लाई बंद करा दी।सबसे बड़ी चिंता यह है कि चार दिन बीत जाने के बाद भी ग्रामीणों को वैकल्पिक पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं मिल सकी। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) को फोन पर सूचना देकर टैंकर भेजने का अनुरोध किया था। उनके अनुसार आश्वासन तो मिला, लेकिन समाचार लिखे जाने तक गांव में टैंकर नहीं पहुंचा था। इसके चलते लोग दूर-दराज के स्थानों से पानी लाने को मजबूर हैं।ग्रामीणों की मांग है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, यदि किसी ने जानबूझकर यह हरकत की है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई हो। साथ ही, जब तक पानी पूरी तरह सुरक्षित घोषित न हो जाए, तब तक गांव में नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए।

सच की आंखें समाचार इस मामले में प्रशासनिक कार्रवाई और जांच की प्रगति पर लगातार नजर बनाए हुए है। यदि जांच में कोई नया तथ्य सामने आता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

📞 मनेश साहू, संपादक
मो.: 9407073701

मनेश पत्रकार आपसे पूछता है…
क्या ग्रामीण क्षेत्रों के शासकीय पेयजल स्रोतों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी, नियमित निगरानी और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था अनिवार्य की जानी चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)
3/related/default