आज की दुनिया में एआई एक अनिवार्य हस्तक्षेपः कुलगुरू”एमसीयू में एआई फार मीडिया एंड कम्युनिकेशन प्रोफेशनल्स विषय पर एफडीपी आरंभ

chif editor MANESH SAHU 9407073701
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सच की आँखे भोपाल। शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों को नई तकनीक पढ़ाते हुए शिक्षकों को खुद भी तैयार रहना होगा। संस्थान और शिक्षक स्वयं को नई तकनीकों और बदलावों के साथ अपडेट करते रहें। जब भी मीडिया जगत में नई तकनीक आई पत्रकारिता विश्वविद्यालय ने उसके साथ कदमताल करते हुए आगे बढ़ने का कार्य किया। अपने सिलेबस और उनकी विषयवस्तु को भी अपडेट किया। अब नए अकादमिक सत्र से एमसीयू के विद्यार्थियों को मीडिया और कम्युनिकेशन की इंडस्ट्री की मांग के अनुसार एआई तकनीक पढ़ाई जाएगी। यह बात एमसीयू एवं मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (एमपीसीएसटी)  के संयुक्त तत्वाधना में आज शुरू हुए एआई फार मीडिया एंड कम्युनिकेशन प्रोफेशनल्स विषय पर एफडीपी के उद्घाटन सत्र में विश्वविद्यालय के कुलगुरू श्री विजय मनोहर तिवारी ने कही। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में एकआई एक अनिवार्य हस्तक्षेप बन चुका है। श्री तिवारी ने कहा कि यह प्रशिक्षण आने वाले विद्यार्थियों के लिए एक अलग अनुभव होने वाला है।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि बतौर  मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक डा. अनिल कोठारी ने कहा कि एआई जैसे विषय पर पाठ्यक्रम डेवलप करने में एमसीयू का बेहतरीन काम है। यह रियल टाइम कार्य है जिसके दूरगामी परिणाम होंगे। उन्होंने कहा कि यह पाठ्यक्र बहुत जरूरी है। इसका शिक्षण एवं प्रशिक्षण भी जरूरी है।

पत्रकारिता में एआई के उपयोग को जरूरी बताते हुए श्री कोठारी ने कहा कि भविष्य में भी विज्ञान पत्रकारिता एवं संचार के क्षेत्र में एमपीसीएसटी और एमसीयू मिलकर कार्य करेंगें। इस अवसर पर मुख्य वक्ता और हरियाणा के गुरू जंभेश्वर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर उमेश आर्य ने कहा कि एआई के साथ काम करने के लिए उसकी बुनियादी समझ बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि हमें एआई की अवधारणा और उसके दर्शन को समझते हुए इसमें काम करना होगा। व्याख्यान के उपरांत सभी अतिथियों ने मिलकर विश्वविद्यालय में पौधरोपण किया। 
प्रथम तकनीकी सत्र में पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान  के प्रोफेसर मुनीशचंद्र त्रिवेदी ने नई शिक्षा नीति और एआई विषय पर चर्चा करते हुए कहा कि एआई शिक्षा को और समावेशी बनाती है। यह विद्यार्थियों को नए विषयों को आसान भाषा में समझने में बहुत सहायक है। उन्होंने प्राम्प्ट कैसे दें यह समझाते हुए कहा कि रिसर्च आदि सेक्टर्स मे ंभी एआई बहुत उपयोगी है।
दूसरे तकनीकी सत्र में प्रोफेसर उमेश आर्य ने हैंड्स आन लर्निगं के तहत एआई प्लेटफाम्र्स पर काम करने के कुछ प्रैक्टिकल करवाए। लंबी रिर्पोट्स का सारांश तैयार करना, वीडियो के बारे में विश्लेषण करना, बुलेट्स पाइंट में सारांश तैयार करना, दो वीडियो रिर्पोट की तुलना करने के कई प्रैक्टिकल उन्होंने विस्तार से समझाए।
सत्रों का संचालन एवं समन्वय विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभागाध्यक्ष डा. पवित्र श्रीवास्वत ने किया। यह एफडीपी 17जुलाई तक चलेगा। यह कार्यक्रम विशेष तौर मीडिया और कम्युनिकेशन से जुड़े अकादमिक और पेशेवरों के लिए डिजाइन किया गया है जो कि अकादमिक और इंडस्ट्री, दोनों ही क्षेत्रों के लोगों लिए आयोजित किया जा रहा है।
    इस एफडीपी में एआई और जेनरेटिव कंटेंट, मल्टिफार्म डेटा विद पिनपाइंट, डीपफेक, सिंथेटिक मीडिया फोरेंसिक्स, एआई न्यूजरूम आर्किटेक्चर, एआई एथिक्स सहित कई अन्य महत्वपूर्ण विषयों का समावेश किया गया है। आगामी दिनों में इस कार्यक्रम में इंडस्ट्री, रिसर्च और अकादमिक क्षेत्रों के कई विशेषज्ञ प्रतिभागियों को प्रशिक्षण देंगे।

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