पार्टी ने आरोप लगाया कि जिले के कई छात्रावासों और शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों को मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल रही हैं। कहीं भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें हैं तो कहीं छात्राओं के लिए विद्यालय और छात्रावास तक पहुंचने के लिए सड़क जैसी बुनियादी सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। मेघासिवनी स्कूल, एकलव्य आवासीय विद्यालय और सीएम राइज गुरैया सहित अन्य संस्थानों की व्यवस्थाओं में सुधार की मांग की गई।
ज्ञापन में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर भी चिंता जताई गई। पार्टी ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को स्थानीय समस्याओं के समाधान पर प्राथमिकता से ध्यान देना चाहिए। सांसद विवेक बंटी साहू पर स्थानीय मुद्दों की अपेक्षा अन्य कार्यक्रमों में अधिक व्यस्त रहने का आरोप लगाते हुए जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय करने की मांग की गई। साथ ही व्यंग्यात्मक रूप से उन्हें "घुमक्कड़ सांसद" का प्रमाण पत्र दिए जाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की गई।
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने दिल्ली के जंतर-मंतर आंदोलन में शहीद हुई छात्राओं के परिजनों को सम्मानजनक आर्थिक सहायता और पुनर्वास की मांग उठाई। इसके अलावा विश्व आदिवासी दिवस पर जिले की सभी देशी और विदेशी शराब दुकानों को एक दिन के लिए बंद रखने की मांग भी की गई।
ज्ञापन देने बड़ी संख्या में पहुंचे कार्यकर्ता
पार्टी ने गांव-गांव में स्वास्थ्य सेवाएं देने वाली आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में वृद्धि करने की मांग की। वहीं किसानों के हित में बीज (पुरिया) वितरण व्यवस्था में बदलाव की मांग करते हुए कहा कि किसानों को बीज लेने के लिए पहले एनपीके या डीएपी उर्वरक खरीदने की अनिवार्यता समाप्त की जाए और बिना अनावश्यक शर्तों के बीज उपलब्ध कराया जाए।
पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि इन मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा।
