छिन्दवाड़ा । रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति का ऐसा पावन पर्व है, जो भाई-बहन के रिश्ते को विश्वास, कर्तव्य, सुरक्षा, सम्मान और आत्मीयता से जोड़ता है। इसी सांस्कृतिक एवं सामाजिक भावना को केंद्र में रखते हुए 18 वर्ष पूर्व नरेला में रक्षाबंधन महोत्सव की शुरुआत की गई थी। यह आयोजन आज एक बड़े सामाजिक उत्सव का रूप ले चुका है।
विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि महोत्सव शुरू करने का उद्देश्य हर बहन को यह विश्वास दिलाना था कि वह अपने भाई के रूप में सदैव उनके साथ खड़े हैं। आज हर वर्ष लाखों बहनें रक्षासूत्र बांधकर अपना स्नेह और आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष 1 लाख 84 हजार 632 बहनों ने रक्षासूत्र बांधा था। यह संख्या केवल एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि बहनों के विश्वास, स्नेह और आत्मीयता की अभिव्यक्ति है। इसी कारण नरेला रक्षाबंधन महोत्सव को विश्व के सबसे बड़े रक्षाबंधन महोत्सव के रूप में पहचान मिली है।
सारंग ने कहा कि किसी भी आयोजन की सफलता केवल उसके आकार से नहीं, बल्कि समाज पर उसके प्रभाव से तय होती है। नरेला का यह महोत्सव अब नरेला तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भोपाल की अन्य विधानसभाओं से भी बड़ी संख्या में बहनें इसमें शामिल होकर रक्षासूत्र बांधती हैं। इस आयोजन ने जनप्रतिनिधि और जनता के बीच औपचारिक संबंधों से आगे बढ़कर परिवार जैसी आत्मीयता का रिश्ता कायम किया है।
उन्होंने कहा कि रक्षासूत्र केवल एक धागा नहीं, बल्कि विश्वास और जिम्मेदारी का प्रतीक है। जनता का विश्वास किसी भी जनप्रतिनिधि के लिए सबसे बड़ी पूंजी है और यह विश्वास जिम्मेदारियों को भी बढ़ाता है।
इस वर्ष भी नरेला रक्षाबंधन महोत्सव 31 अगस्त से प्रारंभ होगा। उन्होंने कहा कि लाखों बहनों द्वारा रक्षासूत्र बांधना उनके लिए सम्मान और जिम्मेदारी का विषय है। उन्होंने बहनों के सम्मान, सशक्तिकरण और स्वाभिमान के लिए सदैव समर्पित रहने का संकल्प दोहराते हुए कहा कि बहनों का स्नेह और आशीर्वाद ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
