एमसीयू में ‘अभ्युदय-2026’ का समापन, पूर्व विद्यार्थियों ने साझा किए सफलता के अनुभव

chif editor MANESH SAHU 9407073701
By -
0
एमसीयू में ‘अभ्युदय-2026’ का समापन, पूर्व विद्यार्थियों ने साझा किए सफलता के अनुभव

भोपाल। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में नवागत विद्यार्थियों के प्रबोधन के लिए आयोजित तीन दिवसीय सत्रारंभ कार्यक्रम ‘अभ्युदय-2026’ का समापन हुआ। कार्यक्रम के तीसरे दिन देशभर से आए विश्वविद्यालय के पूर्व विद्यार्थियों ने नवागत विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव, संघर्ष और करियर की यात्रा साझा करते हुए पत्रकारिता एवं संचार के विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध संभावनाओं से अवगत कराया।

समापन समारोह के मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद श्री रजनीश अग्रवाल ने कहा कि एमसीयू में पत्रकारिता के अध्ययन के दौरान जो कुछ उन्होंने पढ़ा और सीखा, वह उनके राजनीतिक जीवन में भी अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ। पत्रकारिता की पढ़ाई ने उन्हें समाज को देखने और समझने की दृष्टि प्रदान की है।

उन्होंने कहा कि उन्होंने संयोगवश पत्रकारिता का अध्ययन नहीं चुना था, बल्कि विचारपूर्वक इस विषय को अपने अध्ययन का माध्यम बनाया। समाज में क्या घटित हो रहा है और उसके पीछे क्या कारण हैं, इसे समझने की दृष्टि पत्रकारिता प्रदान करती है। पत्रकारिता अपनी संस्कृति, परंपरा और समाज से जुड़ने का अवसर भी देती है। श्री अग्रवाल ने कहा कि सभी व्यावसायिक क्षेत्रों में नैतिकता और मूल्यों का महत्वपूर्ण स्थान है और इन्हीं के कारण वे क्षेत्र टिके हुए हैं। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में वृक्षारोपण भी किया।

चर्चित बिजनेस पत्रकार मृत्युंजय झा ने कहा कि बिजनेस पत्रकारिता में एक गलत आंकड़ा या सूचना बाजार पर सीधा प्रभाव डाल सकती है। एक गलत खबर बड़ा उलटफेर कर सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि पत्रकारिता में एंकर और रिपोर्टर के अलावा भी अनेक महत्वपूर्ण भूमिकाएं और करियर की संभावनाएं मौजूद हैं।

विश्वविद्यालय के प्रथम बैच के विद्यार्थी एवं वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश पंत ने कहा कि पत्रकारिता में सफल होने के लिए जुनून आवश्यक है। विद्यार्थियों को भविष्य की अत्यधिक चिंता करने के बजाय अधिक से अधिक पढ़ने और सीखने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने प्रतिदिन कम से कम दो समाचार पत्र पढ़ने तथा पढ़ी गई सामग्री का दोगुना अभ्यास करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि समाचार लेखन के साथ-साथ वीडियो निर्माण और ग्राफिक्स तैयार करना भी सीखना चाहिए।

रक्षा पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत कृष्ण मोहन मिश्रा ने कहा कि उन्होंने अपनी रुचि के कारण डिफेंस रिपोर्टिंग को चुना। युद्ध और रक्षा से जुड़े विषयों के प्रति समाज की स्वाभाविक जिज्ञासा के कारण इस क्षेत्र की पत्रकारिता की प्रासंगिकता आगे भी बनी रहेगी।

डिजिटल पत्रकार अनिल पांडेय ने कहा कि मीडिया इंडस्ट्री में रोजगार की अनेक संभावनाएं हैं, लेकिन इसके लिए कुशल और दक्ष लोगों की आवश्यकता है। आज मोबाइल फोन के माध्यम से भी बेहतर गुणवत्ता वाले वीडियो तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि शूटिंग इस प्रकार की जानी चाहिए कि संपादन की आवश्यकता कम से कम पड़े।

विकास संवाद के निदेशक सचिन जैन ने कहा कि विश्वविद्यालय ने उन्हें विकास संचार और विश्लेषण की क्षमता प्रदान की, जिसके कारण उन्हें इस क्षेत्र में कार्य करने की दिशा मिली। उन्होंने कहा कि संचार कौशल का उपयोग किस उद्देश्य के लिए करना है, इस पर विचार करना आवश्यक है। पत्रकारिता का सबसे महत्वपूर्ण कौशल ऑब्जर्वेशन है। जितना बेहतर अवलोकन होगा, पत्रकार उतना ही बेहतर बनेगा।

इसी सत्र में पूर्व विद्यार्थी एन. हरि प्रकाश ने केन्या से ऑनलाइन जुड़कर विद्यार्थियों के साथ अपने करियर की यात्रा साझा की। जनसंपर्क के क्षेत्र में कार्यरत आशीष चौहान ने विद्यार्थियों से कहा कि सबसे पहले यह तय करें कि वे क्या करना चाहते हैं और फिर उस क्षेत्र के लिए आवश्यक कौशलों की पहचान कर उन्हें सीखें।

डिजिटल मार्केटिंग इंडस्ट्री एक्सपर्ट आयुषी श्रीवास्तव ने ग्राहकों को बनाए रखने और व्यवसाय को अधिक लोगों तक पहुंचाने के तरीकों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यवसाय के लिए समय पर धन की उपलब्धता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।

एडवरटाइजिंग क्षेत्र में कार्यरत पूर्व छात्र अमित कौसरवाल ने कहा कि प्रभावी संवाद के लिए लोगों को समझना सबसे महत्वपूर्ण गुण है। संचार, ब्रांड प्रमोशन और विज्ञापन के क्षेत्र में वही व्यक्ति सफल हो सकता है, जो इस बात से निरंतर अपडेट रहे कि लोग क्या सोच रहे हैं, क्या कर रहे हैं और क्या देख रहे हैं।

आरकॉम की मैनेजिंग डायरेक्टर कविता कौसरवाल ने कहा कि कुछ नया करने के लिए लोगों से मिलना और संवाद करना आवश्यक है। लोगों से मिलने पर ही नई कहानियां और नए विचार सामने आते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से ईमानदार रहने का आग्रह करते हुए कहा कि जो बात हम नहीं जानते, उसे ईमानदारी से स्वीकार करेंगे, तभी उसे सीख सकेंगे।

राजनीतिक कैंपेनिंग के क्षेत्र में कार्यरत डॉ. सुलभ सिंह ने किरदार, कहानी और किस्सों के माध्यम से अपनी यात्रा विद्यार्थियों के साथ साझा की। पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के पूर्व विद्यार्थी श्री देवरूप आर्या ने कहा कि विश्वविद्यालय ने उन्हें केवल एक प्रोफेशन नहीं, बल्कि एक बेहतर व्यक्तित्व भी दिया है। आईटी क्षेत्र में कार्यरत श्री अभिषेक बेहरा ने भी विद्यार्थियों के साथ अपने विचार साझा किए।

प्रधानमंत्री कार्यालय में पदस्थ डीडी न्यूज के संवाददाता आशुतोष कुमार सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने विद्यार्थियों को अनुशासन सिखाया, जिसका लाभ उन्हें कार्यक्षेत्र में मिलता है। उन्होंने विद्यार्थियों से कंटेंट और भाषा पर मजबूत पकड़ बनाने का आह्वान किया और कहा कि यह आत्मविश्वास बढ़ाने में सहायक होता है।

श्री कुमार सौरभ ने विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने और कठिन लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि खूब पढ़ना और खूब लिखना व्यक्ति को निरंतर निखारता है।

समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु श्री विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि पत्रकारिता अनिश्चितताओं और संघर्षों का क्षेत्र है। ‘अभ्युदय’ में आए पूर्व विद्यार्थियों की सफलता की कहानियां इस बात का प्रमाण हैं कि उन्होंने संघर्ष के माध्यम से ही अपनी पहचान और मुकाम हासिल किया है।

उन्होंने नवागत विद्यार्थियों से आग्रह किया कि तीन दिवसीय ‘अभ्युदय-2026’ कार्यक्रम के दौरान जिस ऊर्जा, उत्साह और प्रेरणा का अनुभव उन्होंने किया है, उसे अपने पूरे शैक्षणिक जीवन में बनाए रखें।

कार्यक्रम के अंत में कुलसचिव प्रो. पी. शशिकला ने आभार प्रदर्शन किया।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)
400/related/default