सड़क के अभाव में डोली बनी सहारा, प्रसव पीड़ा से कराहती प्रसूता को 8 किमी पैदल लाकर पहुंचाया गोप मुख्यालयजामुनडोंगा-चीटीपाठा से गोप तक सड़क नहीं होने से ग्रामीण परेशान, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव

chif editor MANESH SAHU 9407073701
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सच की आंखे जुन्नारदेव। ग्रामीण अंचल की बदहाल सड़क व्यवस्था का खामियाजा एक बार फिर एक प्रसूता और उसके परिवार को भुगतना पड़ा। जनपद पंचायत जुन्नारदेव की ग्राम पंचायत गोप के जामुनडोंगा मजरे के टोले चीटीपाठा से गोप मुख्यालय तक सड़क मार्ग नहीं होने के कारण प्रसव पीड़ा से कराह रही 22 वर्षीय प्रसूता कुस्तरिया पति सोनू मलगाम को ग्रामीणों और परिजनों ने डोली के सहारे करीब 8 किलोमीटर का उबड़-खाबड़ रास्ता तय कर गोप मुख्यालय पहुंचाया।

जानकारी के अनुसार बुधवार रात कुस्तरिया को घर पर प्रसव पीड़ा शुरू हुई। गुरुवार सुबह करीब 6 बजे परिजनों ने पंचायत सरपंच सियाबती कंचनशाह नर्रे को सूचना दी। इसके बाद सरपंच, परिजन और ग्रामीण प्रसूता को डोली में लेकर गोप मुख्यालय पहुंचे। यहां से 108 एंबुलेंस की मदद से उसे तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दमुआ ले जाया गया।

प्रसूता की गंभीर स्थिति को देखते हुए दमुआ अस्पताल से उसे जिला अस्पताल छिंदवाड़ा रेफर किया गया। जिला अस्पताल में प्रसूता ने मृत बच्चे को जन्म दिया। परिजनों के अनुसार प्रसूता की हालत अभी भी गंभीर है और उसे अस्पताल के आईसीयू में रखा गया है।

सड़क और बिजली की सुविधा से भी वंचित हैं कई बसाहटें

ग्राम पंचायत गोप के जामुनडोंगा, चीटीपाठा, सेमरडोल और टेड़ियामऊ जैसे मजरे-टोले आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार इन बसाहटों तक न तो पक्की सड़क पहुंची है और न ही बिजली जैसी आवश्यक सुविधा उपलब्ध है।

सरपंच सियाबती कंचनशाह नर्रे ने बताया कि पंचायत की ग्राम सभा के माध्यम से वर्ष 2016 से लगातार सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए मुख्यमंत्री, कलेक्टर और विधायक सहित संबंधित अधिकारियों को प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

ग्रामीण अनिल मलगाम, अंजूलाल नर्रे, दिनेश मलगाम और सुपाल नर्रे ने बताया कि जामुनडोंगा में करीब 125 घरों की आबादी है। इसके बावजूद यहां सड़क जैसी मूलभूत सुविधा का अभाव है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क नहीं होने के कारण सरकारी कर्मचारी और अन्य सेवाएं भी इन बसाहटों तक आसानी से नहीं पहुंच पातीं।

ग्रामीणों को किसी भी आवश्यक कार्य के लिए करीब 8 किलोमीटर का उबड़-खाबड़ रास्ता तय कर गोप मुख्यालय पहुंचना पड़ता है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से सड़क और बिजली सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।


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