छिंदवाड़ा में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और होटल-रेस्टोरेंट की स्वच्छता को लेकर गंभीर सवाल लगातार उठ रहे हैं। मुख्यमंत्री द्वारा मिलावटखोरी और खाद्य सुरक्षा के मामलों में सख्ती के निर्देशों के बावजूद स्थानीय स्तर पर प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं देने से आम जनता में नाराजगी बढ़ रही है।
शहर और जिले में दूध, पनीर, मावा तथा अन्य खाद्य पदार्थों में कथित मिलावट की शिकायतें सामने आती रही हैं। कई होटल और खाद्य प्रतिष्ठानों में स्वच्छता, साफ-सफाई और खाद्य पदार्थों के सुरक्षित रख-रखाव को लेकर भी सवाल उठते हैं। आरोप हैं कि कुछ स्थानों पर गंदे बर्तनों, अस्वच्छ परिसर और हाइजीन के मानकों की अनदेखी की जाती है। यदि ये शिकायतें सही हैं तो यह सीधे आम नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय है।
विशेष चिंता की बात यह है कि खाद्य प्रतिष्ठानों की नियमित जांच और नमूना कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आम जनता का आरोप है कि संबंधित विभागों की कार्रवाई कई बार केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है। वहीं, कुछ लोग अधिकारियों पर अवैध वसूली और भ्रष्टाचार के आरोप भी लगा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
चाय और अन्य गर्म खाद्य पदार्थों को ऐसे प्लास्टिक या पेपर-कोटेड कपों में परोसे जाने की शिकायतें भी सामने आती हैं, जिनकी खाद्य-सुरक्षा उपयुक्तता की जांच होना जरूरी है। गर्म पेय के साथ किसी भी सामग्री के उपयोग में संबंधित खाद्य-सुरक्षा मानकों का पालन किया जाना चाहिए। स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डालने संबंधी दावों की पुष्टि वैज्ञानिक जांच और सक्षम स्वास्थ्य अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर ही होनी चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि छिंदवाड़ा में खाद्य विषाक्तता या मिलावट से संबंधित मामले सामने आते हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच, नमूना परीक्षण और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया कितनी प्रभावी है? राजस्व, नगर निगम और खाद्य सुरक्षा से जुड़े विभागों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में नियमित निरीक्षण और कानून के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
छिंदवाड़ा की जनता किसी अधिकारी या प्रतिष्ठान के खिलाफ मनमानी कार्रवाई नहीं चाहती, बल्कि निष्पक्ष जांच, पारदर्शी व्यवस्था और कानून का समान रूप से पालन चाहती है। यदि किसी होटल या खाद्य प्रतिष्ठान में नियमों का उल्लंघन मिलता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो।
जिला प्रशासन से अपेक्षा है कि खाद्य सुरक्षा को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रखा जाए। जिले के होटल, रेस्टोरेंट, दूध-पनीर-मावा विक्रेताओं तथा अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों का प्रभावी निरीक्षण कराया जाए, संदिग्ध खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर अधिकृत प्रयोगशाला में जांच कराई जाए और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
आखिर सवाल छिंदवाड़ा की जनता की सेहत का है। मुख्यमंत्री के आदेशों का पालन कागजों पर नहीं, जमीन पर दिखाई देना चाहिए।
